शिव गर्जना के साथ गूंजा राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय : युवा शौर्य रैली एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में जीवंत हुआ शिवाजी महाराज का पराक्रम
अजमेर, 21 फरवरी (हि.स.)। कोई भी राष्ट्र तब तक पराजित नहीं हो सकता, जब तक वह अपनी संस्कृति और मूल्यों की रक्षा करता है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने सामान्य जनमानस में राष्ट्रीय भावना, स्वाभिमान, आत्मसम्मान, स्वराज, स्वधर्म, स्वकर्तव्य और स्वभाषा के प्रति जागरूकता उत्पन्न की। यह उद्गार राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित विशेष समारोह में अपने संबोधन के दौरान व्यक्त किए।
छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शिव गर्जना के साथ युवा शौर्य रैली तथा विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं।
कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि राजस्थान और महाराष्ट्र के इतिहास में अनेक उल्लेखनीय समानताएँ दृष्टिगोचर होती हैं। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार राजस्थान में महाराणा प्रताप राष्ट्र के आदर्श, स्वाभिमान और अस्मिता के प्रतीक रहे, उसी प्रकार महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज ने राष्ट्रधर्म, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा का महान कार्य किया। दोनों ही महापुरुषों ने अपने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प से हजारों-लाखों लोगों की आस्था, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों की जयंती मनाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावना और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। प्रो. भालेराव ने राजस्थान और महाराष्ट्र से जुड़े अनेक प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए दोनों प्रदेशों की वीरभूमि परंपरा और राष्ट्रनिष्ठा को रेखांकित किया।
कुलपति प्रो. भालेराव ने अपने वक्तव्य में उल्लेख किया कि जर्मनी में भी शिवाजी महाराज को धर्मपालक एवं धर्मरक्षक के रूप में स्मरण किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि शिवाजी महाराज की कीर्ति ईरान तक विख्यात थी।
अनेक प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए प्रो. भालेराव कहा कि हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों की सदैव रक्षा करनी चाहिए। यदि हम अपनी सांस्कृतिक पहचान से विमुख हो गए, तो पतन अवश्यंभावी है। उन्होंने कहा कि अनुभव बताता है कि पराजित मन, पराजित राज्य और पराजित राष्ट्र प्रायः विजेता की संस्कृति और संस्कारों को आत्मसात कर लेते हैं। अतः राष्ट्र की सुप्त चेतना को जागृत कर उसे संगठित करना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। शिव गर्जना के साथ निकली युवा शौर्य रैली में विश्वविद्यालय के कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। आरती एवं तिलक के साथ रैली का भव्य स्वागत किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में धनश्री एवं उनकी टीम ने देशभक्ति से ओत-प्रोत मराठी गीत पर मनमोहक प्रस्तुति दी। वहीं प्रीति प्रकाश एवं उनकी टीम ने शिवाजी महाराज द्वारा अफजल खान वध की ऐतिहासिक घटना पर आधारित प्रभावशाली लघु नाट्य प्रस्तुत किया। प्रस्तुति के दौरान गूंजती शिव गर्जना ने सम्पूर्ण वातावरण को वीरता एवं राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत कर दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

