राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति के मुख्य आतिथ्य में न्यायिक अधिकारियों का सेमिनार आयोजित

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राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति के मुख्य आतिथ्य में न्यायिक अधिकारियों का सेमिनार आयोजित


श्रीगंगानगर, 12 जुलाई (हि.स.)। जिला मुख्यालय पर रविवार को न्यायिक अधिकारियों के लिए आयोजित सेमिनार में राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति महेंद्र कुमार गोयल ने न्याय प्रशासन को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और समकालीन चुनौतियों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया। सेमिनार में श्रीगंगानगर के जिला एवं सेशन न्यायाधीश रविन्द्र कुमार, हनुमानगढ़ के जिला एवं सेशन न्यायाधीश तनवीर चौधरी सहित दोनों जिलों के न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया।

सेमिनार के प्रथम सत्र में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने में न्यायाधीशों की भूमिका विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव एवं उत्पीड़न की रोकथाम के लिए पॉश (पीओएसएच) अधिनियम-2013 के प्रावधानों और प्रक्रियाओं पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही महिलाओं के अधिकारों और गरिमा से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों तथा उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। न्यायिक कार्यवाहियों और निर्णयों में लिंग-तटस्थ भाषा के प्रयोग तथा प्रशासनिक कार्यों में लैंगिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।

द्वितीय सत्र में डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराधों में धन की वापसी विषय पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी। इसमें नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) तथा संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत शिकायत दर्ज करने, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों के वर्गीकरण, धनराशि को फ्रीज अथवा होल्ड करने, बैंक खातों एवं संपत्तियों की जब्ती की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। साथ ही जब्त धनराशि की अंतरिम एवं अंतिम अभिरक्षा तथा सक्षम न्यायालय के क्षेत्राधिकार से जुड़े उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख किया गया।

अंतिम सत्र में धन डिक्री (मनी डिक्री) के निष्पादन और संबंधित कार्यवाही विषय पर गहन विचार-विमर्श हुआ। न्यायिक अधिकारियों ने धन डिक्री के प्रभावी निष्पादन से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं और व्यवहारिक चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए तथा न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की।

समापन सत्र में न्यायाधिपति महेंद्र कुमार गोयल के मार्गदर्शन के लिए उनका आभार व्यक्त किया गया। प्रतिभागी न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के विषयक सेमिनार न्यायिक अधिकारियों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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