मातृभाषा हमारी पहचान एवं संस्कृति की परिचायक: प्रो. परिहार

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मातृभाषा हमारी पहचान एवं संस्कृति की परिचायक: प्रो. परिहार


विश्व मायड़भाषा दिवस पर राजस्थानी ज्ञान गोठ एवं युवा प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित

जोधपुर, 21 फरवरी (हि.स.)। मातृभाषा हमारी पहचान एवं संस्कृति की परिचायक है। विश्व के तमाम भाषा वैज्ञानिकों का मानना है कि एक अबोध बालक अन्य भाषाओं के बजाय अपनी मातृभाषा में प्राप्त की गई शिक्षा को शीघ्रता से ग्रहण करता है एवं उसपर जीवनभर प्रभाव बना रहता है।

नई शिक्षा नीति के अन्तर्गत भी इस बात को महत्व दिया गया है। इसलिए हमारे प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा हमारी मातृभाषा राजस्थानी में ही होनी चाहिए। यह विचार जेएनवीयू के सिण्डिकेट सदस्य एवं प्रख्यात प्राणीशास्त्री प्रोफेसर (डॉ.) जीआर. परिहार ने राजस्थानी विभाग, बाबा रामदेव शोधपीठ एवं महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोधकेन्द्र मेहरानगढ के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मायड़भाषा दिवस पर आयोजित राजस्थानी ग्यांन गोठ एवं युवा प्रतिभा सम्मान समारोह में व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में राजस्थानी वैज्ञानिक दृष्टि शिक्षा देना संभव है। राजस्थानी विभागाध्यक्ष डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित ने बताया कि इस अवसर पर जेएनवीयू के कला शिक्षा एवं समाज विज्ञान संकाय अधिष्ठाता प्रोफेसर (डॉ.) औतारलाल मीना ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि राजस्थानी भाषा विश्व की समृद्ध एवं स्वतंत्र भाषा है।

देश की आजादी के साथ ही अन्य भाषाओं की तरह इस भाषा को संवैधानिक मान्यता नही मिलना राजस्थान का दुर्भाग्य है। वर्तमान में राजस्थानी भाषा संवैधानिक मान्यता की हकदार है मगर राजनैतिक उदासीनता की वजह से यह संवैधानिक मान्यता से वंचित है। राजस्थानी विभागाध्यक्ष डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित ने राजस्थानी भाषा का महत्व उजागर करते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश का युवा अपनी मातृभाषा के सांस्कृतिक गौरव को बचाने के लिए संघर्षरत है।

संस्कृति को बचाने के लिए हमारी मातृभाषा का जिंदा रहना नितांत आवश्यक है। महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र के सहायक निदेशक डॉ. महेन्द्रसिंह तंवर ने राजस्थानी भाषा के संवैधानिक मान्यता आंदोलन पर विस्तृत जानकारी दी।

महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र के सहायक निदेशक डॉ. महेन्द्रसिंह तंवर ने हाजी जफर खान सिंधी पुरस्कार- 2026 जोधपुर आकाशवाणी केन्द्र के वरिष्ठ उद्घोषक गौतमराज नवल ‘काकू’ को देने की घोषणा की गई। समारोह में कुसुम टाक, श्रवणराम भादू, संतोष चौधरी, जीवनलाल शर्मा, एनडी निम्बावत, मोहनलाल वैष्णव एवं भंवरलाल सुथार को साफा-शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया। तत्पश्चात् कुलगीत की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का संचालन विभागीय सदस्य डॉ. मीनाक्षी बोराणा ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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