भ्रामक स्वास्थ्य दावों पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 100 किलो टोफू नष्ट

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भ्रामक स्वास्थ्य दावों पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 100 किलो टोफू नष्ट


भ्रामक स्वास्थ्य दावों पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 100 किलो टोफू नष्ट


जयपुर, 03 जुलाई (हि.स.)। शुद्ध आहार, मिलावट पर वार अभियान के तहत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने खाद्य उत्पादों पर भ्रामक स्वास्थ्य संबंधी दावों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भ्रामक प्रचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नवीनतम निर्देशों की पालना में की गई इस कार्रवाई के दौरान करीब 100 किलोग्राम टोफू नष्ट कराया गया तथा संबंधित उत्पादों के नमूने लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की गई है।

आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण, राजस्थान डॉ. टी. शुभमंगला ने बताया कि सीएमएचओ जयपुर द्वितीय की टीम ने नाड़ा की ढाणी, गोल्यावास स्थित मैसर्स गौड़ हेल्दी फूड का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि सिल्कन ब्रांड के टोफू के पैकेटों पर रिच इन विटामिन, हेल्प इन स्ट्रेंथनिंग बोन्स, रिड्यूस रिस्क ऑफ एनीमिया, एंटी कैंसर प्रॉपर्टीज तथा लोवर्स कोलेस्ट्रॉल लेवल्स जैसे अप्रमाणित एवं भ्रामक स्वास्थ्य संबंधी दावे अंकित कर उत्पाद का विक्रय किया जा रहा था।

अतिरिक्त आयुक्त खाद्य सुरक्षा भगवत सिंह ने बताया कि बिना वैज्ञानिक प्रमाण के स्वास्थ्य संबंधी दावे करना उपभोक्ताओं को भ्रमित करने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। एफएसएसएआई ने भी ऐसे दावों पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया हुआ है। कार्रवाई के दौरान टोफू के नमूने लिए गए तथा बिक्री के लिए तैयार 220 ग्राम के 300 पैकेट और एक किलोग्राम के 30 पैकेट, कुल लगभग 100 किलोग्राम टोफू नष्ट कराया गया। इसके अलावा पैकिंग के लिए रखे करीब दो हजार पाउच जब्त कर सीज कर दिए गए। नए स्वीकृत लेबल मिलने तक उत्पाद के निर्माण और बिक्री पर रोक लगा दी गई है।

इसी क्रम में खाद्य सुरक्षा टीम ने मालवीय नगर स्थित ब्लिंकिट के वेयरहाउस का भी निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि फास्ट अप रीलोड ब्रांड की नॉन-कार्बोनेटेड पेय सामग्री को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भ्रामक तरीके से स्पोर्ट्स ड्रिंक के रूप में प्रदर्शित कर बेचा जा रहा था। टीम ने उत्पादों के नमूने लेकर डिजिटल साक्ष्य भी एकत्र किए हैं। मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विभाग के अनुसार एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि स्पोर्ट्स ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक जैसे शब्दों के लिए कोई निर्धारित मानक नहीं है। ऐसे शब्दों का उत्पाद के नाम, लेबल या प्रचार में उपयोग भ्रामक माना जाएगा। इसी प्रकार किसी भी खाद्य उत्पाद को रोग निवारण, स्वास्थ्य सुधार या चिकित्सीय लाभ से जोड़ने वाले दावे बिना वैज्ञानिक प्रमाण के नहीं किए जा सकते।

विभाग ने बताया कि यह मामला खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग एवं प्रदर्शन) विनियम, 2020 के प्रावधानों का उल्लंघन है। अधिनियम की धारा 24 के तहत भ्रामक विज्ञापन एवं अनुचित व्यापार व्यवहार प्रतिबंधित हैं, जबकि धारा 53 के तहत भ्रामक विज्ञापन पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने आमजन से अपील की है कि किसी भी खाद्य उत्पाद पर अंकित स्वास्थ्य संबंधी दावों पर बिना सत्यापन के विश्वास न करें। इम्यूनिटी बढ़ाने, बीमारी ठीक करने या सुपरफूड जैसे दावों वाले उत्पाद खरीदते समय सतर्क रहें तथा केवल वैध एफएसएसएआई लाइसेंस और सही लेबलिंग वाले उत्पाद ही खरीदें। विभाग ने संदिग्ध उत्पादों की सूचना तत्काल उपलब्ध कराने की भी अपील की है।

विभाग के अनुसार संबंधित फर्मों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुशील चोटवानी, विनोद थारवान, रमेश यादव, नंद किशोर कुमावत एवं राजेश नागर शामिल रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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