पंचायत राज चुनावों को जानबूझकर टाल रही है भाजपा सरकार: डोटासरा

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पंचायत राज चुनावों को जानबूझकर टाल रही है भाजपा सरकार: डोटासरा


जयपुर, 20 जनवरी (हि.स.)। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर पंचायत राज एवं नगर निकाय चुनावों को वन स्टेट-वन इलेक्शन के नाम पर लंबे समय से रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका सीधा खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है और विकास कार्य ठप पड़े हैं। डोटासरा मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय जयपुर में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में 78 पंचायत समितियों और 12 जिला परिषदों का कार्यकाल अभी शेष है। इनमें से 52 पंचायत समितियों और 6 जिला परिषदों का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक होने के कारण 15 अप्रैल से पहले इनके चुनाव कराना संभव नहीं है, जिससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा अव्यवहारिक सिद्ध होती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पंचायत समितियों एवं जिला परिषद वार्डों के पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया 4 जुलाई 2025 तक पूर्ण करने की समय-सीमा तय की थी, लेकिन इस समय-सीमा के काफी समय बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। पंचायत राज विभाग ने 17 दिसंबर 2025 को दो सप्ताह में आपत्तियां लेकर अंतिम वार्ड सूची प्रकाशित करने का परिपत्र जारी किया था, लेकिन 20 जनवरी 2026 तक किसी भी जिले में अंतिम सूची जारी नहीं की गई।

डोटासरा ने आरोप लगाया कि यह स्थिति साबित करती है कि भाजपा सरकार और उसके नेता पंचायत राज व नगर निकाय चुनावों की प्रक्रिया को पूरी तरह हाईजैक कर मनमानी कर रहे हैं। डोटासरा ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने 31 दिसंबर 2025 को पंचायत राज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 के लिए निर्वाचक नामावली तैयार करने का कार्यक्रम जारी किया था। इसके तहत प्रपत्र-ए1 की विभिन्न समय-सीमाएं तय की गईं, लेकिन वार्डों का परिसीमन पूरा नहीं होने के कारण मतदाता सूची का भौतिक सत्यापन भी संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के निर्देशानुसार यह समस्त प्रक्रिया 27 जनवरी 2026 तक पूरी होनी थी, लेकिन सरकार द्वारा अंतिम वार्ड सूची जारी नहीं करने से यह कार्य भी अधर में लटक गया है, जिससे साफ जाहिर होता है कि सरकार चुनाव कराने के प्रति गंभीर नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव नहीं होने के कारण राज्य का लगभग 3000 करोड़ रुपए का बजट रोक रखा है। इसी दबाव में अब राज्य सरकार जल्दबाजी में पंचायत चुनाव कराने की कोशिश कर रही है, जबकि पूरी प्रक्रिया नियमों के विपरीत चलाई जा रही है।

उन्होंने भाजपा नेताओं राजेंद्र राठौड़ और अरुण चतुर्वेदी पर आरोप लगाया कि वे प्रशासनिक प्रक्रिया से बाहर होते हुए भी जिला कलेक्टरों और प्रशासकों को मौखिक निर्देश देकर चुनाव प्रक्रिया में देरी करवा रहे हैं।

डोटासरा ने आरोप लगाया कि जनभावनाओं के खिलाफ सीमांकन कर कांग्रेस समर्थित मतदाताओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। जहां कांग्रेस समर्थित मतदाता अधिक हैं, वहां वार्डों को बड़ा बनाया जा रहा है ताकि प्रतिनिधित्व कम हो। उन्होंने कहा कि आपत्तियों की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी वार्डों में बदलाव किया जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में एसआईआर चल रही है, जिसके तहत करीब 41 लाख मतदाताओं के नाम हटाने का निर्णय लिया गया है और इसका प्रकाशन 24 फरवरी 2026 को होगा। ऐसे में जिस मतदाता सूची को अशुद्ध बताया जा रहा है, उसी के आधार पर पंचायत चुनाव कराना पूरी तरह अनुचित है।

डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में पंचायत राज चुनावों की प्रक्रिया को लेकर सरकार की स्पष्ट नीति नहीं है। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि निर्णय कौन ले रहा है और कौन मौखिक निर्देश देकर सीमांकन की अंतिम सूची रोक रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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