नगर निगम जयपुर की अनूठी पहल, ' शिवार्पणम्' मंदिरों के निर्माल्य से बनेगी प्रसाद रूपी जैविक खाद

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नगर निगम जयपुर की अनूठी पहल, ' शिवार्पणम्' मंदिरों के निर्माल्य से बनेगी प्रसाद रूपी जैविक खाद


जयपुर, 27 जुलाई (हि.स.)। सावन के पावन माह में श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण को एक सूत्र में पिरोते हुए नगर निगम जयपुर ने एक अभिनव पहल 'शिवार्पणम्' की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से शहर के प्रमुख शिवालयों में भगवान शिव को अर्पित होने वाले बेलपत्र, पुष्प एवं अन्य जैविक निर्माल्य को अब कचरे में नहीं फेंका जाएगा, बल्कि वैज्ञानिक विधि से जैविक खाद में परिवर्तित कर श्रद्धालुओं एवं आमजन को 'शिवार्पणम्' प्रसाद पैकेट के रूप में वितरित किया जाएगा।

नगर निगम का उद्देश्य धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है।

क्या है 'शिवार्पणम्'?

सावन के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना करते हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में बेलपत्र, पुष्प और अन्य जैविक निर्माल्य अर्पित किया जाता है। अब इन पवित्र अवशेषों को वैज्ञानिक प्रक्रिया से लगभग 30 दिनों में जैविक खाद में परिवर्तित किया जाएगा।

कैसे काम करेगी व्यवस्था

प्रत्येक सोमवार चयनित मंदिरों से नगर निगम का ईवी हॉपर निर्माल्य संग्रह करेगा।

सामग्री को निकटतम उद्यान में स्थापित श्रेडर मशीन से प्रोसेस किया जाएगा।

कम्पोस्ट पिट में वैज्ञानिक विधि से जैविक खाद तैयार होगी।

तैयार खाद को 'शिवार्पणम्' पैकेट में श्रद्धालुओं एवं नागरिकों तक पहुंचाया जाएगा।

पायलट परियोजना के अंतर्गत ताड़केश्वर महादेव, झारखंड महादेव, जंगलेश्वर महादेव, चमकारेश्वर महादेव एवं रोजगारेश्वर महादेव मंदिरों से इस अभियान की शुरुआत होगी। अभियान पूरे श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार संचालित किया जाएगा।

आयुक्त ओम कसेरा ने कहा

भगवान शिव को अर्पित हुआ प्रत्येक बेलपत्र और पुष्प श्रद्धा का प्रतीक है। उसका स्थान कचरे में नहीं, बल्कि धरती की सेवा में होना चाहिए। 'शिवार्पणम्' आस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने वाला एक अभिनव मॉडल है।

हूपर निर्माल्य संग्रह करेगा।

सामग्री को निकटतम उद्यान में स्थापित श्रेडर मशीन से प्रोसेस किया जाएगा।

कम्पोस्ट पिट में वैज्ञानिक विधि से जैविक खाद तैयार होगी।

तैयार खाद को 'शिवार्पणम्' पैकेट में श्रद्धालुओं एवं नागरिकों तक पहुंचाया जाएगा।

पायलट परियोजना के अंतर्गत ताड़केश्वर महादेव, झारखंड महादेव, जंगलेश्वर महादेव, चमकारेश्वर महादेव एवं रोजगारेश्वर महादेव मंदिरों से इस अभियान की शुरुआत होगी। अभियान पूरे श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार संचालित किया जाएगा।

आयुक्त ओम कसेरा ने कहा

भगवान शिव को अर्पित हुआ प्रत्येक बेलपत्र और पुष्प श्रद्धा का प्रतीक है। उसका स्थान कचरे में नहीं, बल्कि धरती की सेवा में होना चाहिए। 'शिवार्पणम्' आस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने वाला एक अभिनव मॉडल है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश

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