गिद्धों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त : “गिद्ध संरक्षण एवं पर्यावरण” विषयक राष्ट्रीय सेमिनार सफलतापूर्वक संपन्न
बीकानेर, 05 सितंबर (हि.स.)। राजकीय डूंगर कॉलेज के प्राणिशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित “गिद्ध संरक्षण एवं पर्यावरण” विषयक राष्ट्रीय सेमिनार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
हाइब्रिड मोड पर संपन्न हुई इस संगोष्ठी में देशभर से आए 250 विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों ने पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने में गिद्धों की अनिवार्य भूमिका और उनके संरक्षण पर गहन मंथन किया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) के कुलगुरू डॉ. अखिल रंजन, डॉ. प्रताप सिंह, डॉ. पंकज गोस्वामी तथा प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र पुरोहित बतौर अतिथि उपस्थित रहे।
आयोजन सचिव डॉ. आनंद कुमार ने सेमिनार की प्रासंगिकता और पर्यावरण संतुलन में गिद्धों के महत्व पर प्रकाश डाला।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति डॉ. अखिल रंजन ने गिद्धों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए उनके संवर्धन पर बल दिया।
विभागाध्यक्ष डॉ. प्रताप सिंह ने पश्चिमी राजस्थान और विशेष रूप से 'जोड़बीड़' क्षेत्र में गिद्धों की वर्तमान स्थिति का ब्योरा प्रस्तुत किया। वहीं, प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र पुरोहित ने प्राकृतिक सफाईकर्मी के रूप में गिद्धों की पारिस्थितिकी उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी।
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के सचिन रानडे ने 'कैप्टिव ब्रीडिंग' (संरक्षित प्रजनन) के जरिए गिद्धों की आबादी बढ़ाने के सफल प्रयासों पर चर्चा की। द्वितीय सत्र: एमजीएसयू के प्रो. अनिल छंगाणी ने भारत में गिद्धों की वर्तमान स्थिति और संरक्षण के भावी परिदृश्य को रेखांकित किया। हेमंत वाजपेयी ने पिंजौर स्थित 'गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र' के अनुभवों, उनके प्रजनन और उत्तरजीविता (Survival) से जुड़े तकनीकी पहलुओं को साझा किया। सेमिनार के दौरान शोधार्थी अदनान द्वारा प्लास्टिक कचरे का गायों और गिद्धों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले घातक दुष्प्रभावों पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसे प्रतिभागियों ने काफी सराहा।
कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. बलराम सांई ने किया। अंत में डॉ. अर्चना पुरोहित ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

