ऑपरेशन सिंदूर के शहीद सार्जेंट सुरेंद्र मोगा का नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में शामिल
झुंझुनूं, 26 जून (हि.स.)। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मेहरादासी गांव के वीर सपूत और भारतीय वायु सेना के सार्जेंट सुरेंद्र मोगा को ऑपरेशन सिंदूर में दिए गए सर्वोच्च बलिदान के लिए आधिकारिक राष्ट्रीय सम्मान मिल गया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किए गए हैं, जिनमें सार्जेंट सुरेंद्र मोगा का नाम भी शामिल है।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की वेबसाइट पर जारी ‘रोल ऑफ ऑनर’ में सार्जेंट सुरेंद्र मोगा का नाम दर्ज किया गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की त्रि-आयामी दीवार पर वर्ष 2025 के खंड में भी उनका नाम अंकित कर दिया गया है।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के ‘त्याग चक्र’ में स्थापित 16 गोलाकार ग्रेनाइट दीवारों पर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के नाम, रैंक और यूनिट अंकित हैं। अब इस गौरवशाली सूची में सार्जेंट सुरेंद्र मोगा का नाम भी स्थायी रूप से जुड़ गया है।
भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह स्वयं मेहरादासी गांव पहुंचे थे। उन्होंने शहीद की पत्नी सीमा देवी, माता नानू देवी तथा अन्य परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया था और भरोसा दिलाया था कि भारतीय वायु सेना अपने जांबाज के बलिदान को कभी नहीं भूलेगी। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्जेंट सुरेंद्र मोगा को मरणोपरांत वायु सेना मेडल (गैलेंट्री) से सम्मानित किया। वहीं भारतीय वायु सेना ने नई दिल्ली स्थित अपनी एक आधिकारिक विंग का नाम ‘सुरेंद्र हॉल’ रखकर भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के रोल ऑफ ऑनर में नाम शामिल होने के बाद शहीद के परिवार ने संतोष और गर्व व्यक्त किया है। उल्लेखनीय है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवानों में सार्जेंट सुरेंद्र मोगा भारतीय वायु सेना के एकमात्र शहीद थे, जबकि अन्य पांच जवान भारतीय थल सेना से संबंधित थे। इसके साथ ही पूरे अभियान में राजस्थान से शहीद होने वाले भी वे एकमात्र सैनिक रहे।
झुंझुनूं जिले के मेहरादासी गांव से निकलकर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सार्जेंट सुरेंद्र मोगा का नाम अब देश के अमर वीरों की सूची में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। लंबे इंतजार के बाद मिले इस आधिकारिक सम्मान ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे झुंझुनूं जिले और राजस्थान को गौरवान्वित किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश

