एमसीपीआईयू का राष्ट्रीय कन्वेन्शन : साम्प्रदायिक जनविरोधी नीतियों के विरूद्ध संघर्ष का आह्वान

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एमसीपीआईयू का राष्ट्रीय कन्वेन्शन : साम्प्रदायिक जनविरोधी नीतियों के विरूद्ध संघर्ष का आह्वान


विभिन्न प्रस्तावों के साथ एमसीपीआईयू का दो दिवसीय राष्ट्रीय कन्वेन्शन सम्पन्न

जोधपुर, 24 फरवरी (हि.स.)। पिछले दो दिनों से चल रहे भारत की मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कन्वेन्शन का विभिन्न प्रस्तावों के पारित होने के साथ समापन हुआ। समापन पार्टी के वरिष्ठ नेता कुलदीप सिंह ने किया।

कन्वेन्शन में प्रस्तुत अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियों व संगठनात्मक रिपोर्ट पर चर्चा सम्पन्न कर उपस्थित सदस्यों के सुझावों को सम्मिलित कर अंतिम रूप दिया गया। राजनीतिक रिपोर्ट पर उपस्थित सदस्यों के प्रश्नों का कुलदीप सिंह ने विस्तार से जवाब दिया।

संगठनात्मक रिपोर्ट अशोक एम. ओंकार द्वारा प्रस्तुत की गई। कन्वेन्शन में चर्चा करते हुए विभिन्न वक्ताओं अशोक एम. ओंकार, प्रेमसिंह भंगू, कुलदीप सिंह, गोपीकिशन, एमवी रेड्डी, किरणजीत सिंह, बृजकिशोर, महेन्द्र ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि केंद्र सरकार नवउदारवादी कॉर्पोरेट के पक्ष में आर्थिक नीतियों को लागू करने और लोगों के बीच सांप्रदायिक बंटवारा करने में तेज़ी से आगे बढ़ रही है।

लोकतांत्रिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले, नवउदारवादी नीतियों को तेज़ी से लागू करना, और सरकारी संस्थाओं से समझौता करना, मौजूदा सरकार के बढ़ते तानाशाही व फासिस्ट चरित्र में दिखता है। अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार आर्थिक सांख्यिकी के साथ छेड़छाड़ करके झूठा दावा करती रहती है कि देश विकास की राह पर है, जबकि सच इसके उलट है। राष्ट्रीय कन्वेंशन में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ वॉर के आगे भारत सरकार के बिना शर्त समर्पण करने, देश, किसानों, दूसरे मेहनतकश लोगों और घरेलू इंडस्ट्रीज़ के हितों की बलि देकर एग्रीमेंट करने पर गहरी चिंता व्यक्त की।

राष्ट्रीय कन्वेन्शन में नवउदारवादी और मनुवाद और सनातन धर्म की दकियानूसी, साम्प्रदायिक फासिस्ट सोच के खिलाफ, बड़े पैमाने पर अभियान चलाने, गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, सरकारी संपत्तियों का निजीकरण, किसान और मज़दूर वर्ग के संबंध में प्रस्ताव पारित किए गए। कन्वेन्शन में वैश्वीकरण और साम्प्रदायिक फासीवाद के खिलाफ लोकप्रिय आंदोलनों के लिए ज़मीन तैयार करने का भी प्रस्ताव पारित किया गया। कन्वेन्शन में वक्ताओं ने कहा कि इसके लिये वामपंथी लोकतांत्रिक ताकतों का एक फ्रंट बनाना होगा और आत्मनिर्भरता और लोकतंत्र के लिए संघर्ष का एक असली प्रोग्राम लागू करना होगा।

कन्वेन्शन में सभी लेफ्ट और लोकतांत्रिक ताकतों को एक करने और देश भर में वैश्वीकरण, साम्प्रदायिक फासीवाद के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल राजनीतिक ताकतों और सामाजिक आंदोलनों का एक बड़ा मंच बनाने की पहल करने का प्रस्ताव पारित किया गया। कन्वेन्शन में 23 मार्च को भगत सिंह शहीद दिवस को साम्राज्यावादी-साम्प्रदायिक विरोधी दिवस के रूप में आयोजित करने का प्रस्ताव पारित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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