आईआईटी जोधपुर का नवाचार : जलवायु चुनौतियों से निपटने में स्वच्छ ऊर्जा से स्मार्ट जल प्रबंधन तक में निभाई जा रही भूमिका

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आईआईटी जोधपुर का नवाचार : जलवायु चुनौतियों से निपटने में स्वच्छ ऊर्जा से स्मार्ट जल प्रबंधन तक में निभाई जा रही भूमिका


जोधपुर, 15 जनवरी (हि.स.)। ऊर्जा संक्रमण और जल संकट जैसी दोहरी चुनौतियों के बीच वैज्ञानिक नवाचार सतत विकास की मजबूत नींव बनकर उभर रहा है। इसी दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर की यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग की सह प्राध्यापक व सह डीन (अनुसंधान एवं विकास) डॉ. शोभना सिंह का शोध स्वच्छ ऊर्जा के कुशल भंडारण और बुद्धिमान जल प्रबंधन के नए मानक स्थापित कर रहा है। उनका कार्य भारत के सतत विकास लक्ष्यों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

आईआईटी जोधपुर में एनर्जी कन्वर्जन एंड स्टोरेज रिसर्च लैब का नेतृत्व कर रही डॉ. सिंह और उनकी टीम इंजीनियरिंग विज्ञान को कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस के साथ जोड़ते हुए देश की दो प्रमुख आवश्यकताओं सतत ऊर्जा प्रणालियां और जल-संवेदनशील बुनियादी ढांचा के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित कर रही है। डॉ. शोभना सिंह ने बताया कि आज वास्तविक चुनौती ऊर्जा उत्पादन नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को कितनी दक्षता से संग्रहित और उपयोग किया जाए तथा जल संसाधनों का कितना बुद्धिमत्तापूर्ण प्रबंधन किया जाए यह है। आईआईटी जोधपुर में हम ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो स्केलेबल, किफायती और भारत के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप हैं।

सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की बढ़ती भागीदारी के साथ ऊर्जा की अनियमितता एक वैश्विक चुनौती बन गई है। डॉ. सिंह का शोध उच्च-तापीय थर्मल ऊर्जा भंडारण प्रणालियों पर केंद्रित है, जो बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के लिए भरोसेमंद और मांग-आधारित ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित कर सकती हैं। पारंपरिक बैटरियों की तुलना में थर्मल ऊर्जा भंडारण दीर्घकालिक भंडारण, अधिक ऊर्जा घनत्व, कम लागत और सरल प्रणाली डिज़ाइन जैसे लाभ प्रदान करता है।

आईआईटी जोधपुर में शोध दल 700 डिग्री सेल्सियस तक कार्य करने में सक्षम अगली पीढ़ी की थर्मल ऊर्जा भंडारण प्रणालियां विकसित कर रहा है। इस शोध की एक प्रमुख उपलब्धि उच्च-चालकता धातु मिश्रधातुओं को फेज़ चेंज मटीरियल (पीसीएम) के रूप में उपयोग करना है, जिन्हें कॉम्पैक्ट कैप्सूल में संलग्न किया जाता है। यह तकनीक 500 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर सटीक ऊष्मा भंडारण और तीव्र ऊर्जा मुक्त करने में सक्षम है। ये प्रणालियां 20 से 700 डिग्री सेल्सियस के तापमान दायरे में विद्युत उत्पादन, औद्योगिक प्रक्रियाओं, परिवहन और थर्मल प्रबंधन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। शोध में प्रायोगिक अध्ययन के साथ भौतिकी आधारित कम्प्यूटेशनल मॉडल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे ऊष्मा और द्रव्यमान हस्तांतरण की जटिल प्रक्रियाओं को समझते हुए प्रणाली के प्रदर्शन का अनुकूलन किया जा सके।

ऊर्जा के साथ जल संसाधनों की स्थिरता भी डॉ. सिंह के शोध का एक प्रमुख आयाम है, विशेषकर राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में। आईआईटी जोधपुर में उनकी टीम ने एआईओटी आधारित स्मार्ट जल निगरानी एवं प्रबंधन प्रणाली विकसित की है, जो रीयल-टाइम सेंसर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और मशीन लर्निंग आधारित प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स को एकीकृत करती है। आईआईटी जोधपुर परिसर में एक स्मार्ट वॉटर सप्लाई ग्रिड स्थापित किया जा चुका है, जो जल प्रवाह और गुणवत्ता की निरंतर निगरानी करता है। किसी भी प्रकार की असामान्यता या संदूषण की स्थिति में यह प्रणाली त्वरित अलर्ट प्रदान करती है, जिससे जल वितरण, पुन: उपयोग और उपचार के लिए सटीक निर्णय संभव हो पाते हैं। इस सफलता के आधार पर टीम ने हाल ही में जोधपुर शहर की झीलों की जल गुणवत्ता निगरानी हेतु एक पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया है, जिसमें स्वदेशी, कम लागत वाले सेंसर और एज कम्प्यूटिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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