अस्तित्व की लड़ाई लड़ता सर्कस आज भी जीत रहा दिल — पुष्करन

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अस्तित्व की लड़ाई लड़ता सर्कस आज भी जीत रहा दिल — पुष्करन


उदयपुर, 4 अगस्त (हि.स.)। भले ही सर्कस में अब प्रशिक्षित शेर—हाथी नजर नहीं आते, भले ही सर्कस तम्बू से ऑडिटोरियम के मंच पर आ गया है, फिर भी मजाल है कि सर्कस का आकर्षण कम हुआ हो, कला समय के साथ ज्यादा निखरी है, आज भी अपनी मेहनत से सर्कस लोगों के दिलों को जीत रहा है। हालांकि, सर्कस को भी सरकार के संरक्षण की दरकार है, क्योंकि यह भी एक कला है और संरक्षण के अभाव में युवा पीढ़ी इससे दूर हो रही है। कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा, सम्मान मिलेगा तो युवा पीढ़ी इस कला को भी कॅरियर के रूप में चुनना शुरू कर देगी।

यह कहना है रेम्बो सर्कस के सीनियर क्लाउन बीजू पुष्करन का। झीलों के शहर उदयपुर में हफ्ते भर के लिए धूम मचाने आए रेम्बो सर्कस के सीनियर क्लाउन मंगलवार को उदयपुर की मीडिया से मुखातिब थे। सर्कस के तम्बू और शेर—हाथी वाले पुराने दौर से लेकर आज तक के बदलाव का अनुभव रखने वाले पुष्कन कहते हैं कि पुरानी पीढ़ी आज भी सर्कस के उस हंटर मास्टर को याद करती है जो शेरों को अपने इशारों पर नचाता था।

उन्होंने कहा कि पहले सर्कस में पशु भी आकर्षण का केंद्र होते थे, लेकिन सरकारी नियमों के बाद अब पूरी तरह मानव कौशल आधारित प्रस्तुतियां दी जाती हैं। उनका कहना है कि आज सबसे बड़ी चुनौती नई पीढ़ी का सर्कस से दूर होना है। शिक्षित युवा इस क्षेत्र में कॅरियर नहीं बनाना चाहते।

उन्होंने कहा कि सर्कस दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ-साथ पारंपरिक सर्कस कला को जीवित रखने का प्रयास कर रहा है। सर्कस बदलते दौर में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। उसे सरकारी सहयोग और नई पीढ़ी की भागीदारी की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सर्कस केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अनुशासन, तालमेल, संतुलन, जोखिम से मुकाबला और सामाजिक समरसता का भी संदेश देता है। सर्कस आज भी पूरे हिन्दुस्तान के दर्शन कराता है। सर्कस में तब भी हिन्दुस्तान के कोने—कोने से कलाकार शामिल होते थे और परिवार की तरह रहते थे, और आज भी वही माहौल है। यहां जाति, धर्म या ऊंच-नीच का कोई भेदभाव नहीं होता और सभी कलाकार एक परिवार की तरह रहते हैं। कलाकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है तथा सभी का बीमा कराया जाता है।

बीजू पुष्करन ने बताया कि यूरोप सहित कई देशों में सर्कस कलाकारों को सरकारी संरक्षण, सम्मान और पुरस्कार मिलते हैं, जबकि भारत में सर्कस कलाकारों को वह पहचान नहीं मिल पाती। उनका मानना है कि यदि सरकार सर्कस कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और पुरस्कार देना शुरू करे तो युवाओं का रुझान फिर से इस कला की ओर बढ़ सकता है।

सर्कस प्रबंधन के अनुसार शो में जिम्नास्टिक, डबल शो, एलईडी डांस, एलईडी शो, क्लाउन एक्ट, फुटबॉल जगलिंग सहित 22 से 25 आकर्षक प्रस्तुतियां शामिल हैं। शुक्रवार तक प्रतिदिन दो शो शाम 4 और 7 बजे आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि अंतिम रविवार को सुबह 11 बजे, दोपहर 1:30 बजे, शाम 4 बजे और रात 7 बजे कुल चार शो होंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

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