युवाओं को रोजगार लेने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनाना होगा – निम्बाराम

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युवाओं को रोजगार लेने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनाना होगा – निम्बाराम


उदयपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम ने युवाओं से आह्वान किया कि उन्हें केवल रोजगार लेने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनना होगा।

निम्बाराम सोमवार को यहां राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के 40वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने आत्मनिर्भर और सशक्त भारत निर्माण के लिए समाज परिवर्तन और स्वावलंबन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का अधूरा स्वप्न आज भी अधूरा है और उसे पूर्ण करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

निम्बाराम ने कहा कि समाज परिवर्तन सत्ता के बल से नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के छोटे-छोटे प्रयासों और जिम्मेदारी निभाने से संभव है। उन्होंने युवाओं को चरित्र निर्माण, सामाजिक समरसता और परिवार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दी। उन्होंने छुआछूत जैसी कुरीतियों के उन्मूलन, पिछड़े वर्गों की आत्मग्लानि समाप्त करने और देश के गौरवपूर्ण प्रतीकों, संविधान एवं महापुरुषों के प्रति सम्मान बनाए रखने पर विशेष बल दिया।

उन्होंने भारत के गौरव और स्वामी विवेकानंद के विश्व धर्म सम्मेलन में ऐतिहासिक योगदान का स्मरण कराते हुए कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति और जीवन मूल्यों के माध्यम से भारत ने विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ‘दरिद्रनारायण की सेवा’ को ही ईश्वर सेवा बताया और बताया कि युवाओं में स्वबोध और स्वावलंबन का बीजारोपण कर ही विकसित भारत का निर्माण संभव है।

कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए स्थापना दिवस को केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र चिंतन और विचारों का दिवस बताया। उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन अर्थात् स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य बोध और पारिवारिक संस्कार राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं।

विशिष्ट अतिथि प्रो. कैलाश सोडाणी, सलाहकार राज्यपाल उच्च शिक्षा ने विद्यापीठ की स्थापना और विकास यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है और भारतीय ज्ञान, इतिहास एवं स्वास्थ्य परंपराओं को युवाओं तक प्रभावी रूप से पहुंचाना आवश्यक है।

कुल प्रमुख एवं कुलाधिपति भंवरलाल गुर्जर ने संस्थापक जनुभाई द्वारा 1937 में विद्यापीठ की स्थापना और 1987 में विश्वविद्यालय के रूप में उन्नयन का उल्लेख किया। उन्होंने विद्यापीठ की सफलता में समर्पित कार्यकर्ताओं की भूमिका को सराहा और भविष्य में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिउ कार्यकर्ताओं को समर्पण भाव से कार्य करने का आह्वान किया।

समारोह में बीकानेर वेटनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुमंत व्यास, वेटनरी महाविद्यालय नवानिया के डीन प्रो. शिव शर्मा, पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा, प्रताप गौरव केंद्र के निदेशक अनुराग सक्सेना सहित अन्य डीन, निदेशक, अकादमिक और गैर अकादमिक कार्यकर्ता, विद्यार्थी और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरीश चैबीसा ने किया जबकि आभार रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली ने जताया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

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