विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के विशेषज्ञ ने किया जागरूक
जयपुर, 28 जुलाई (हि.स.)। अधिकांश लोग तब तक खुद को स्वस्थ मानते हैं, जब तक उन्हें दर्द, बुखार या अन्य स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। लेकिन वायरल हेपेटाइटिस (हेपेटाइटिस-बी और सी) ऐसी गंभीर बीमारी है, जो वर्षों तक बिना किसी लक्षण के शरीर में पनपती रहती है और धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाती है। इसका पता अक्सर तब चलता है, जब बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है।
विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के वरिष्ठ पेट, आंत एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेन्द्र सुल्तानिया ने बताया कि हेपेटाइटिस-बी और सी का संक्रमण लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के रह सकता है। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है, जबकि वायरस लगातार उसके लिवर को क्षति पहुंचाता रहता है। जब तक थकान, पीलिया, पेट में सूजन, भूख कम लगना या बिना किसी कारण वजन घटना जैसे लक्षण सामने आते हैं, तब तक लिवर गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका होता है।
उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस की समय पर पहचान के लिए केवल एक साधारण ब्लड टेस्ट की जरूरत होती है। यदि संक्रमण शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए तो इसका प्रभावी उपचार संभव है। समय पर इलाज से लिवर सिरोसिस, लिवर फेल्योर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वर्तमान में हेपेटाइटिस-सी के अधिकांश मामलों का सफल इलाज उपलब्ध है, जबकि हेपेटाइटिस-बी के मरीज नियमित दवाइयों और चिकित्सकीय निगरानी के साथ सामान्य एवं स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ग्लोबल हेपेटाइटिस रिपोर्ट-2026 के अनुसार, प्रतिदिन 4,900 से अधिक लोग हेपेटाइटिस-बी या सी से संक्रमित होते हैं। दुनिया भर में करीब 28.7 करोड़ लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस से प्रभावित हैं और हर वर्ष लाखों लोगों की मृत्यु इस बीमारी के कारण होती है। भारत उन देशों में शामिल है, जहां हेपेटाइटिस-बी का बोझ सबसे अधिक है। ऐसे में समय पर जांच और जागरूकता बेहद जरूरी है।
डॉ. सुल्तानिया ने बताया कि भारत सरकार के नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीएचसीपी) के तहत देशभर में स्क्रीनिंग और उपचार सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्हें यह तक पता नहीं कि वे हेपेटाइटिस से संक्रमित हैं, क्योंकि उन्होंने कभी जांच ही नहीं कराई।
उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस केवल शराब पीने वालों की बीमारी नहीं है। यह संक्रमित रक्त, असुरक्षित इंजेक्शन, बिना जांच किए गए रक्त चढ़ाने, संक्रमित चिकित्सा उपकरणों और संक्रमित मां से नवजात शिशु में भी फैल सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने लिवर के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए।
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि जिन लोगों को पुरानी लिवर की बीमारी है, परिवार में हेपेटाइटिस का इतिहास है, पहले कभी रक्त चढ़ाया गया है या जिनके कार्य के दौरान रक्त के संपर्क में आने की आशंका रहती है, उन्हें चिकित्सक की सलाह पर हेपेटाइटिस की जांच अवश्य करानी चाहिए।
विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट है कि लक्षणों का इंतजार करने के बजाय समय पर जांच करानी चाहिए। एक साधारण ब्लड टेस्ट गंभीर लिवर रोगों से बचाव का माध्यम बन सकता है। जागरूकता, समय पर स्क्रीनिंग और उचित उपचार ही वायरल हेपेटाइटिस से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

