दोहरा लाभ उठा रहे हैं धर्म बदलने वाले — डामोर

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दोहरा लाभ उठा रहे हैं धर्म बदलने वाले — डामोर


उदयपुर, 08 जून (हि.स.)। धर्म बदलने वाले दोहरा लाभ उठाकर मूल जनजाति समाज का हक भी मार रहे हैं। वे एक तरफ चुपचार धर्म बदलकर कागजों में अनुसूचित जनजाति श्रेणी में ही बने रहते हैं, ऐसे में वे जनजाति समाज को मिलने वाले संवैधानिक लाभों को भी प्राप्त करते रहते हैं और अल्पसंख्यक समाज की योजनाओं का भी लाभ उठाते हैं। जनजाति सुरक्षा मंच ने इस तथ्य सहित अन्य ऐसे कई तथ्य केन्द्र सरकार के समक्ष रखे हैं जिसमें बताया गया है कि जनजाति समाज का धर्मान्तरण देश की अखण्डता के लिए भी खतरा है। इसलिए अनुसूचित जाति (एससी) की तरह ही अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए भी यह प्रावधान शीघ्र आवश्यक है कि धर्म बदलने पर एसटी श्रेणी के अंतर्गत मिलने वाला लाभ नहीं मिलेगा।

यह बात वनवासी कल्याण परिषद के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व कुलपति टी.सी. डामोर ने सोमवार को यहां वनवासी कल्याण परिषद के कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा में कही। उन्होंने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में 24 मई को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित जनजाति समागम 2026 जनजातीय संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा और समाज ने अपनी चिंता केन्द्र सरकार और राष्ट्रपति तक पहुंचाई।

डामोर ने कहा कि संविधान में एसटी के संदर्भ में स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के कारण विघटनकारी ताकतों ने यह भ्रम फैला दिया कि जनजातियों का धर्म न्यूट्रल है, जबकि जनजाति समाज में भी सप्तपदी विवाह संस्कार, अग्नि से अंतिम संस्कार सहित कई परम्पराएं और मान्यताएं सनातन हिन्दू धर्म की हैं। इस तरह के फैलाए जा रहे भ्रम दूर करने के लिए जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधियों ने अनुसूचित जनजाति की स्पष्ट वैधानिक परिभाषा, जनजातीय सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा तथा संबंधित संवैधानिक प्रावधानों में आवश्यक संशोधन की मांग दोहराई है।

उन्होंने बताया कि समागम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने जनजातीय समाज को भारत की सांस्कृतिक आत्मा का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि यह आयोजन आने वाले समय में जनजातीय समाज के महाकुंभ के रूप में स्मरण किया जाएगा।

डामोर ने पत्रकारों के सवाल पर कहा कि केन्द्र सरकार से शीघ्र ही अल्पसंख्यक योजनाओं के पोर्टल व जनजाति योजनाओं के लिए पोर्टल का समायोजन करवा कर ऐसे प्रावधान की मांग की जाएगी कि दोहरे लाभ की नीयत से धर्म बदलने वालों की हकीकम सामने आ सके। इसके लिए केन्द्र सरकार से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) से इस पर वृहद शोध कराने की भी मांग की गई है।

जनजााति सुरक्षा मंच के राजस्थान प्रदेश संयोजक लालूराम कटारा ने बताया कि राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सलूंबर, खेरवाड़ा, झाड़ोल, कोटड़ा, आबूरोड, राजसमंद, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, कोटा, झालावाड़, जालौर, बाड़मेर सहित अनेक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता समागम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जनजातीय समाज के सांस्कृतिक संरक्षण, जागरूकता और सामाजिक संगठन के लिए अभियान निरंतर चलाया जाएगा।

राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के प्रदेश सह संगठन मंत्री हररतन डामोर ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए चिंता जताई कि देश के एक राज्य की विधानसभा में राष्ट्रगान नहीं गाया जाता, इस स्थिति पर सिर्फ जनजाति समाज को ही नहीं, पूरे देश को चिंतित होना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

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