मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ‘जल स्वावलंबी’ बन रहा राजस्थान

WhatsApp Channel Join Now
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ‘जल स्वावलंबी’ बन रहा राजस्थान


जयपुर, 05 अप्रैल (हि.स.)। भौगोलिक दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में कम वर्षा, अनियमित मॉनसून, भूजल के अत्यधिक दोहन और मरुस्थलीय क्षेत्र की अधिकता के कारण जल संसाधनों की कम उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में वर्षा के जल को व्यर्थ नहीं बहने देना और उसे भविष्य के लिए सहेजना ही एकमात्र उपाय है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पुनर्जीवित कर चलाए जा रहे ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0’ के जरिए हजारों गांवों के लाखों परिवारों को राहत पहुंचाई जा रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य जल संकट से प्रभावित सभी गांवों को चरणबद्ध तरीके से कवर कर

‘मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0’ से जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण का समग्र मॉडल प्रस्तुत किया जा रहा है। वर्षा जल के अधिकतम संचयन के लिए एनिकट, चेक डैम, तालाब एवं जोहड़ का निर्माण किया जा रहा है, साथ ही पुराने जल स्रोतों की मरम्मत कर पुनर्जीवित किया जा रहा है। वहीं भूजल स्तर में सुधार के लिए कुएं बनाए जा रहे हैं और सूखे बोरवेल को रिचार्ज पिट में बदला जा रहा है। इसी का परिणाम है कि कई स्थानों पर भूजल स्तर में सुधार हुआ है और गांवों में पेयजल एवं सिंचाई के लिए जल उपलब्धता बढ़ने लगी है। इसके अलावा कृषि उत्पादकता और हरित आवरण में वृद्धि, मिट्टी का कटाव कम होने और जैव विविधता में सुधार होने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ रहे हैं।

बजट 2024-25 में घोषित इस अभियान के लिए कुल 11 हजार 200 करोड़ रुपए का बजट रखा गया। जिससे 20 हजार गांवों में 5 लाख वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया। अभियान के पहले चरण में 349 पंचायत समितियों के 5 हजार 135 गांवों में कार्य करवाए गए। वहीं 1 लाख 10 हजार से अधिक कार्यों के लक्ष्य के विरुद्ध 1 लाख 16 हजार से अधिक कार्य किए जा चुके हैं। जिन पर 2 हजार 500 करोड़ रुपए व्यय किए गए हैं।

इसी प्रकार दूसरे चरण में 337 पंचायत समितियों में एक लाख से अधिक कार्य करवाने का लक्ष्य रखा गया। जिसके विरुद्ध 2 हजार 880 करोड़ रुपए के 1 लाख 4 हजार से अधिक कार्यों का अनुमोदन किया जा चुका है। इनमें से 1 हजार 48 करोड़ से अधिक के 45 हजार से ज्यादा कार्यों की स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं। इस चरण में अब तक 148 करोड़ रुपए से ज्यादा व्यय कर 8 हजार से ज्यादा कार्य पूरे किए जा चुके हैं और शेष कार्यों पर तेजी से काम जारी है। वहीं, बजट 2026-27 में इस अभियान के तृतीय चरण के तहत 2 हजार 500 करोड़ रुपए की लागत से 5 हजार गांवों में 1 लाख 10 हजार कार्य करवाने की घोषणा की गई है।

जनकल्याण के लिए चलाए जा रहे ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0’ में जनभागीदारी के लिए ग्राम पंचायतों की सक्रिय भूमिका तय की गई है। कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए ग्राम स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया है। स्वयंसेवी संगठनों के साथ सीएसआर के तहत निजी कंपनियों का सहयोग भी लिया जा रहा है, जिससे सरकारी खर्च में भी कमी आई है। योजना को प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे जीआईएस आधारित मैपिंग, ड्रोन सर्वे, जल संरचनाओं के डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग किया जा रहा है, जिससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और सतत निगरानी सुनिश्चित हुई है। वहीं, इस अभियान के जल जीवन मिशन, कर्मभूमि से मातृभूमि जैसी अन्य योजनाओं से समन्वय के कारण संसाधनों का बेहतर उपयोग और व्यापक प्रभाव सुनिश्चित हुआ है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन के अनुरूप ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0’ एक दूरदर्शी और प्रभावी पहल है, जिससे जल संकट का धीरे-धीरे समाधान हो रहा है, तथा ग्रामीण विकास, कृषि उन्नति और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। श्री शर्मा के नेतृत्व में किए जा रहे नवाचारों से आने वाले समय में राजस्थान जल संकट से उबरकर एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरकर सामने आएगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

Share this story