तेरह साल तक ऑपरेशन की तारीख का इंतजार, 15 साल की तन्वी ने दिल्ली एम्स में तोड़ा दम

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तेरह साल तक ऑपरेशन की तारीख का इंतजार, 15 साल की तन्वी ने दिल्ली एम्स में तोड़ा दम


जयपुर, 02 सितंबर (हि.स.)। इलाज की तारीखों के फेर में एक 15 वर्षीय छात्रा की जिंदगी थम गई। कोटा के गुमानपुरा निवासी तन्वी ने 24 अगस्त को दिल्ली एम्स में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। तन्वी महज दो साल की उम्र से वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (वीएसडी), यानी दिल में छेद की बीमारी से जूझ रही थी। परिवार का आरोप है कि करीब 13 वर्षों तक वह इलाज और ऑपरेशन की उम्मीद में एम्स के चक्कर काटते रहे, लेकिन हर बार सर्जरी की तारीख आगे बढ़ती रही।

तन्वी नौवीं कक्षा की छात्रा थी। उसके पिता मुकेश रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर काम करते हैं। बेटी की मौत के बाद परिवार दिल्ली में ही है। तन्वी के ताऊ सुनील के अनुसार, जब तन्वी दो साल की थी, तभी उसके दिल की बीमारी का पता चला था। इसके बाद से उसका इलाज दिल्ली एम्स में चल रहा था। चिकित्सकों की ओर से समय-समय पर जांच के लिए बुलाया जाता रहा। परिवार हर बार इस उम्मीद के साथ कोटा से दिल्ली पहुंचता था कि अब बेटी की सर्जरी हो जाएगी, लेकिन उन्हें अगली तारीख दे दी जाती थी।

परिवार का दावा है कि 100 से अधिक बार तन्वी को ऑपरेशन के लिए एम्स ले जाया गया, लेकिन सर्जरी नहीं हो सकी।

इस बार भी 24 अगस्त को उसे एम्स ले जाया गया था। परिवार के मुताबिक जांच प्रक्रिया के दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।

परिवार का कहना है कि सर्जरी में लगातार हो रही देरी को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत भी की थी। ताऊ सुनील ने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद एम्स प्रशासन की ओर से केस वापस लेने का दबाव बनाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

तन्वी के पिता मुकेश का कहना है कि यदि बेटी का समय पर ऑपरेशन हो जाता तो शायद आज वह उनके बीच होती। उन्होंने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।

तन्वी की मौत के बाद परिवार ने चिकित्सा व्यवस्था और लंबे समय तक चलने वाली सर्जरी की प्रतीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्षों तक इलाज की उम्मीद में दिल्ली के चक्कर लगाने वाले परिवारों के लिए ऐसी व्यवस्था बेहद पीड़ादायक है।

मामले में परिवार द्वारा लगाए गए लापरवाही और दबाव के आरोपों की आधिकारिक जांच के बाद ही उनकी पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल तन्वी की मौत ने लंबे समय तक इलाज की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों और उनके परिवारों की मुश्किलों को एक बार फिर सामने ला दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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