माइनिंग लीज के विरोध में लामबद्ध हुए ग्रामीण, कहा चार सौ बीघा में पर्यावरण को पहुंचेगा नुकसान
चित्तौड़गढ़, 12 मई (हि.स.)। जिले के भदेसर तहसील के सुखवाड़ा, हसमतगंज, वजीरगंज, गणपत खेड़ा सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने 300-400 बीघा बिलानाम भूमि पर प्रस्तावित माइनिंग लीज का विरोध किया। मंगलवार को दो बसों में भर कर जिला मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। साथ ही खनन होने पर मतदान के बहिष्कार की चेतावनी दी है। बाद में ग्रामीणों ने निंबाहेड़ा में खनिज अभियंता कार्यालय पहुंच का प्रदर्शन किया।
ग्रामीण मोहनलाल धाकड़ ने बताया कि सुखवाड़ा और आस पास के गांवों में जमीन को खनिज विभाग लीज पर देने की तैयारी कर रहा है। इसकी जानकारी मिलते ही आस पास के ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया। गांवों से दो बसों में कई ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और माइनिंग लीज का विरोध जताया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र में खनन कार्य शुरू किया गया तो व्यापक स्तर पर विरोध होगा और किसी भी कीमत पर खनन नहीं होने दिया जाएगा। पंचायत क्षेत्र के ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि यदि माइनिंग लीज आवंटित की गई तो आगामी सभी चुनावों का सामूहिक बहिष्कार किया जाएगा। यहां शोभालाल धाकड़, मुकेश धाकड़, देवीलाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे।
ग्रामीण मोहनलाल धाकड़ ने बताया कि प्रस्तावित भूमि पहाड़ी क्षेत्र में है, जहां तालाब, तलाई, एनीकट, वाटरशेड योजना के तहत ट्रेंच निर्माण एवं बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया है। पास में सैकड़ों बीघा चारागाह भूमि है जहां 6-7 गांवों के मवेशी व आवारा गौवंश चरते हैं। ऐसे में पर्यावरण को काफी नुकसान होगा। प्रशासक शोभालाल धाकड़ ने बताया कि क्षेत्र में खेजड़ी, बबूल सहित हजारों पेड़ हैं। लीज जारी होने पर कटाई से पर्यावरण को गंभीर नुकसान होगा। खनन से उड़ने वाली धूल से आसपास की कृषि भूमि व फसलों को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि खनन क्षेत्र के पास पांच तालाब हैं जिनमें साल भर पानी रहता है। हजारों पशु-पक्षी इन पर निर्भर हैं। पानी की आवक का मुख्य स्रोत यही पहाड़ियां हैं। खनन शुरू होने से जल स्रोतों पर संकट खड़ा हो जाएगा।
ग्रामीणों ने बताया कि 25 अप्रैल को आयोजित ग्रामसभा में प्रस्ताव संख्या-2 के तहत ग्रामवासियों, वार्ड पंचों एवं प्रशासक ने सर्वसम्मति से माइनिंग लीज आवंटन का विरोध करते हुए प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद ग्रामीणों की बैठक में भी खनन कार्य का पुरजोर विरोध का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि पर्यावरण संरक्षण, चारागाह भूमि और जल स्रोतों की सुरक्षा को देखते हुए प्रस्तावित माइनिंग लीज को तत्काल निरस्त किया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल

