चालीस विला-कॉटेज खरीद मामले की न्यायिक जांच कराए सरकार : खाचरियावास
जयपुर, 29 अक्टूबर (हि.स.)। पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े 40 विला-कॉटेज खरीद मामले में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि अधिकारी को एपीओ करना पर्याप्त नहीं है। मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए, ताकि लेन-देन से जुड़े तथ्यों का खुलासा हो सके।
खाचरियावास ने कहा कि शिखर अग्रवाल मुख्यमंत्री के ओएसडी और मुख्यमंत्री सचिवालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों और किए गए कार्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जांच का दायरा केवल 40 विला-कॉटेज की खरीद तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उस अवधि के अन्य संदिग्ध लेन-देन और निर्णयों को भी इसमें शामिल किया जाए।
कांग्रेस नेता ने राइजिंग राजस्थान के तहत उद्योगपतियों को जमीन आवंटन, निवेश प्रोत्साहन और कर छूट देने के मामलों की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि किन उद्योगपतियों और कंपनियों को कितनी जमीन और किस दर पर आवंटित की गई तथा कितनी कर छूट और अन्य रियायतें दी गईं, इसका विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकारी जमीन और करदाताओं के धन से जुड़ी रियायतों में पारदर्शिता पर जोर दिया।
खाचरियावास ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि करीब ढाई साल में एक ही कंपनी से 40 विला-कॉटेज खरीदने और बाद में उन्हें उसी कंपनी को लीज पर देने का मामला सामने आया है। उन्होंने खरीद से लेकर लीज पर देने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच कर इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि अन्य मामलों में नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ जांच एजेंसियां कार्रवाई करती हैं, इसलिए इस प्रकरण की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार, केवल एपीओ करने से पूरे मामले की जिम्मेदारी तय नहीं हो सकती।
उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

