विजयादशमी 20 अक्टूबर को: गुरु के कर्क राशि में उच्च रहने और श्रवण नक्षत्र के संयोग में होगा पूजन

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विजयादशमी 20 अक्टूबर को: गुरु के कर्क राशि में उच्च रहने और श्रवण नक्षत्र के संयोग में होगा पूजन


जयपुर, 14 अक्टूबर (हि.स.)। आश्विन शुक्ल दशमी का पावन पर्व विजयादशमी इस बार मंगलवार, 20 अक्टूबर को विभिन्न शुभ योगों के दुर्लभ संयोग में मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस अवसर पर राजधानी जयपुर सहित प्रदेशभर में अपराजिता, शमी वृक्ष, शस्त्र एवं आयुध पूजन के विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।

पंडित राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि इस वर्ष विजयादशमी पर देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में उच्च स्थिति में रहेंगे। गुरु 31 अक्टूबर तक कर्क राशि में विराजमान रहेंगे, जो ज्ञान, धर्म, न्याय और सद्बुद्धि के कारक माने जाते हैं। इसके साथ ही इस दिन श्रवण नक्षत्र का विशेष संयोग रहेगा, जिसके देवता स्वयं भगवान श्री हरि विष्णु हैं। मंगलवार का दिन होने से यह पर्व साहस, पराक्रम और आत्मबल को बढ़ाने वाला रहेगा।

शुभ विजय मुहूर्त में नए कार्यों की शुरुआत होगी फलदायी

विजयादशमी पर अत्यंत शुभ विजय मुहूर्त रहेगा। सनातन परंपरा में इस दिन को किसी भी नए कार्य, व्यापार, शिक्षा, यात्रा या महत्वपूर्ण लक्ष्य की शुरुआत के लिए अबूझ और श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि इस समय लिया गया संकल्प सफलता दिलाता है।

विजयादशमी के दिन अपराह्न काल में अपराजिता देवी का पूजन करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके अलावा शमी वृक्ष का पूजन भी प्रमुख परंपराओं में शामिल है। महाभारत कालीन प्रसंग के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष में ही छिपाए थे। यही कारण है कि इस दिन शमी पूजन और शस्त्र सम्मान की परंपरा निभाई जाती है।

सिटी पैलेस और आरएसएस शाखाओं में होगा शस्त्र पूजन

विजयादशमी पर विभिन्न स्थानों पर शस्त्र एवं आयुध पूजन का विधान है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से शहर में विभिन्न स्थानों पर पथ संचलन निकाले जाएंगे तथा शाखा स्तर पर शस्त्र पूजन होगा। इसके अलावा सिटी पैलेस, राजपूत सभा भवन, क्षत्रिय संघ कार्यालय सहित अनेक सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा शस्त्रों का पूजन किया जाएगा।

शर्मा के अनुसार रावण दहन केवल एक बाहरी आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशोधन का अवसर है। रावण के दस सिर प्रतीकात्मक रूप से काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, स्वार्थ, अन्याय, अमानवीयता और अहंकार के सूचक हैं। रावण दहन के साथ हर व्यक्ति को अपने भीतर के इन दस विकारों को त्यागकर सदाचार और सकारात्मकता अपनाने का संकल्प लेना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

Livevns.news Desk
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