जगद्गुरु वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज ने बताए याेग शास्त्र के गूढ़ रहस्य
उदयपुर, 03 जनवरी (हि.स.)। मीरा नगर के विशाल प्रांगण में कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु पूज्यपाद वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज के पावन स्नेहाशीष में चल रहे श्री महालक्ष्मी कोटि कुंकुमार्चन यज्ञ पूजा साधना महामहोत्सव अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। एक साथ हजारों श्रद्धालु अनुशासित बैठ महायज्ञ विधान, पूजा और साधना कर रहे हैं।
समिति के अध्यक्ष नानालाल बया, महामंत्री देवेन्द्र मेहता ने बताया कि श्री एकलिंगनाथ शिव पुराण कथा के छठे दिन जगद्गुरु वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज ने योग शास्त्र की गहरी बातें बताई। बताया कि जब आप अत्यधिक हताशा, निराशा महसूस करें तो किसी बगीचे में जाकर बैठिये। वहां शांत बैठकर थोड़ा ध्यान करें और तीन बार गहरी सांस लेकर छोड़ें। स्वतः अत्यधिक ऊर्जा से भर उठेंगे। नाभि से गहरी श्वांस खींचे, हवा न खींचें। श्वांस जितनी धीमी लेंगे उम्र उतनी लंबी होगी। कछुआ इसका जीवंत प्रमाण है। यह योग शास्त्र का रहस्य है किंतु उतना ही आसान है।
गुरुदेव ने कहा आप अपना आभामंडल सुधारने का सतत प्रयत्न करें। तब आपको मनोवांछित सफलताएं मिलना स्वतः प्रारंभ हो जाएगी। मकड़ी को आभामण्डल के लिए कहीं नहीं जाना पड़ता। उसके द्वारा बनाया जाल उसका आभामण्डल है जिसमें उसके मन के अनुसार वस्तुएं स्वतः आकर्षित होकर आती है।
गुरुदेव ने विभिन्न मुद्राओं के माध्यम से सुख समृद्धि, शांति प्राप्त करने के उपाय बताये। साथ ही विभिन्न मुद्राओं के माध्यम से देवी देवताओं की कृपा आकर्षित करने के तरीके भी चमकाए।
जगद्गुरू वसन्त विजयानन्द गिरी जी महाराज ने कथा में कहा वशिष्ट ऋषि, कवचिक राजा, इंद्र, कामधेनु, नंदिनी के प्रसंग का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। गुरुदेव ने कथा का सार बताया कि अहंकार अंततः हारता है। दुख जीवन को निखारता है। सुख में आनन्द जरूर आता है लेकिन जीवन में निखार दुख से ही आता है।
कथा में निम्बाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने उपस्थित होकर जगद्गुरु पूज्यपाद वसंत विजयानन्द गिरी जी का आशीर्वाद लिया। कृपलानी ने गुरुदेव को पुष्प माला अर्पित की। कृपलानी का कृष्णगिरी शक्तिपीठ के अध्यक्ष शंकेश जैन ने उपरना और माला पहनाकर सम्मान किया।
सुबह साधना विधान में जगद्गुरु वसंत विजयानन्द गिरी जी के श्रीमुख से गहन मंत्रोच्चार के साथ हजारों श्रद्धालु धर्म लाभ ले रहे हैं। समृद्धि को आकर्षित करने वाले जीबू कॉइन, समृद्धि कलश सिद्ध किये जा रहे हैं, वहीं पवित्र महालक्ष्मी यज्ञ में भी रोजाना तीन से चार घंटे अनवरत प्रक्रिया में श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

