पांच पीढ़ियों से निभा रहे परंपरा: मथुरा का मुस्लिम परिवार बना रहा 105 फीट का रावण

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पांच पीढ़ियों से निभा रहे परंपरा: मथुरा का मुस्लिम परिवार बना रहा 105 फीट का रावण


पांच पीढ़ियों से निभा रहे परंपरा: मथुरा का मुस्लिम परिवार बना रहा 105 फीट का रावण


पांच पीढ़ियों से निभा रहे परंपरा: मथुरा का मुस्लिम परिवार बना रहा 105 फीट का रावण


पांच पीढ़ियों से निभा रहे परंपरा: मथुरा का मुस्लिम परिवार बना रहा 105 फीट का रावण


जयपुर, 16 अक्टूबर (हि.स.)। दशहरे पर रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन आदर्श नगर का दशहरा सामाजिक सद्भाव और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल भी पेश करता है। यहां हर साल रावण और कुंभकर्ण के विशाल पुतले मथुरा से आने वाला एक मुस्लिम कारीगर परिवार तैयार करता है। खास बात यह है कि यह परंपरा पांच पीढ़ियों से निभाई जा रही है। चांदबाबू खां और राजा भाई सहित परिवार के सदस्य पिछले करीब दो महीने से पुतले बनाने में जुटे हैं।

आदर्श नगर स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में जन्माष्टमी के अगले दिन से ही परिवार जयपुर पहुंचकर निर्माण कार्य शुरू कर देता है। बांस, कपड़े, कागज और रंगों की मदद से विशाल पुतलों को आकार देने में पूरे परिवार की मेहनत लगती है। करीब डेढ़ से दो महीने तक चलने वाले इस काम के दौरान परिवार मंदिर परिसर में ही रहता है और शाकाहारी भोजन करता है। परिवार के लिए यह केवल रोजी-रोटी का काम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा और आस्था से जुड़ा दायित्व है।

श्रीराम मंदिर प्रन्यास और श्री सनातन धर्म सभा की ओर से 20 अक्टूबर(मंगलवार) को आदर्श नगर के दशहरा मैदान में विशाल दशहरा महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस बार 105 फीट ऊंचे रावण और 90 फीट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतले आकर्षण का केंद्र रहेंगे। श्री सनातन धर्म सभा की ओर से वर्ष 1956 से दशहरा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।

उपाध्यक्ष राजीव मनचंदा के अनुसार शुरुआत में यहां करीब 7 से 8 फीट ऊंचा रावण बनाया जाता था। समय के साथ आयोजन का स्वरूप बढ़ता गया और अब 105 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाता है। मथुरा निवासी चांद बाबू खां बताते हैं कि उनके परिवार ने शुरुआत में 20 फीट ऊंचा रावण बनाया था। आज यह परंपरा पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच चुकी है। परिवार का मुख्य व्यवसाय कपड़े की सिलाई और चांदी की पाजेब बनाने का है, लेकिन दशहरे के अवसर पर सभी सदस्य अपना काम छोड़कर जयपुर आते हैं और पुतले बनाने में जुट जाते हैं।

आदर्श नगर के रावण का स्वरूप भी खास है। इसके दस सिरों में नौ सिर मानव रूप में और एक सिर गधे का बनाया जाता है। यह परंपरा मंदसौर से प्रेरित बताई जाती है। इसके पीछे मान्यता है कि अहंकार मनुष्य को मूर्खता और विवेकहीनता की ओर ले जाता है। यहां दशहरे से पहले नवविवाहित जोड़े और नवजात शिशुओं को लेकर परिजन भी रावण के पुतले के दर्शन करने पहुंचते हैं। लोगों का विश्वास है कि इससे दांपत्य जीवन और संतान का भविष्य शुभ होता है।

महोत्सव के तहत मंगलवार दोपहर बाद श्रीराम मंदिर से भगवान राम और लक्ष्मण के स्वरूपों के साथ लवाजमे सहित शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा पंचवटी सर्किल, राजा पार्क चौराहा, ध्रुव मार्ग, लक्ष्मीनारायण मंदिर, कृष्ण प्रणामी मंदिर, कृष्ण मंदिर, 20 दुकान, स्वामी नंदराम मंदिर, स्वामी गंगादास मंदिर, बर्फखाना, मामा की होटल और पुलिया नंबर एक होते हुए दशहरा मैदान पहुंचेगी। मार्ग में व्यापार मंडलों की ओर से शोभायात्रा का स्वागत किया जाएगा।

सभा अध्यक्ष हरचरण लेकर ने बताया कि शाम 7:30 बजे रावण दहन होगा। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सांसद मंजू शर्मा होंगी। महापौर सुनील कोठारी और विधायक कालीचरण सराफ विशिष्ट अतिथि रहेंगे। रावण दहन के बाद श्रीराम मंदिर में भगवान राम का राजतिलक किया जाएगा। दशहरा मैदान में बच्चों के लिए झूले और खाने-पीने की स्टॉल भी लगाई जाएंगी।

सभा के उपाध्यक्ष एवं आतिशबाजी प्रभारी राजीव मनचंदा ने बताया कि रावण दहन से पहले विशेष आतिशबाजी की जाएगी। इसमें नियाग्रा फॉल जैसे रंगीन झरनों, आसमान से बरसती चमकीली अशर्फियों, सुनहरी अनार, धूमकेतु और चारों दिशाओं में तैरती हवाई मछलियों जैसी आकृतियां देखने को मिलेंगी। आसमान में स्टार वार जैसा नजारा भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।

लंबे बांसों पर घूमती रंगीन चकरियां,ऑक्टोपस की आकृतियां, रंग-बिरंगी हवाई आतिशबाजी और फूलों के गुलदस्तों जैसी रोशनी से दशहरा मैदान जगमगाएगा। रावण दहन के दौरान पुतले की आंखों से शोले और मुंह से आग के गोले निकलेंगे। उसकी नाभि और सिर पर अग्नि चक्र घूमेगा, जबकि तलवार और ढाल से सुनहरी चिंगारियां फूटेंगी। भगवान राम के स्वरूप द्वारा रावण की नाभि में अग्निबाण छोड़ने के साथ दहन शुरू होगा।

चांद बाबू खां और राजा खान के अनुसार रावण का पुतला बनाना केवल एक आयोजन में योगदान देना नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम भी है। एक ओर मंदिर परिसर में दशहरे की तैयारी होती है, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम परिवार पूरी निष्ठा से इस परंपरा को आगे बढ़ाता है। पांच पीढ़ियों से जारी यह विरासत संदेश देती है कि अलग-अलग धर्मों के लोग मिलकर साझा सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत कर सकते हैं। आयोजकों को इस बार भी दशहरा महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

Livevns.news Desk
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