कांग्रेस ने वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांटा: शेखावत

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कांग्रेस ने वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांटा: शेखावत


जोधपुर, 16 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। अपने निवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान शेखावत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति के चलते वंदे मातरम को दो हिस्सों में विभाजित किया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया।

शेखावत ने कहा कि वंदे मातरम को केवल एक गीत के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत रहा है। उनके अनुसार, वंदे मातरम ने लाखों लोगों को आजादी के आंदोलन से जुडऩे और देश के लिए बलिदान देने की प्रेरणा दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे स्वतंत्रता आंदोलनों को एकता के सूत्र में जोडऩे में भी वंदे मातरम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने का काम किया। शेखावत ने आरोप लगाया कि संविधान सभा के निर्णय के बावजूद कांग्रेस ने मन से कभी वंदे मातरम को वह सम्मान नहीं दिया, जिसका वह हकदार था। उन्होंने वंदे मातरम के विभाजन को देश के विभाजन की दिशा में आगे बढऩे वाला कदम बताया।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि संसद की ओर से कानून पारित किए जाने के बाद वंदे मातरम से जुड़े कृत्यों का विषय कानूनी दृष्टि से भी गंभीर हो गया है। उन्होंने इस मामले को देश की भावनाओं और इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।

ऑनलाइन कोचिंग पहल का किया स्वागत

मीडिया से बातचीत के दौरान शेखावत ने प्रधानमंत्री की ऑनलाइन कोचिंग को लेकर की गई पहल का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय की जरूरतों के मुताबिक देश की शिक्षा व्यवस्था में लगातार बदलाव और आधुनिकीकरण जरूरी है। शेखावत ने कहा कि देश में कोचिंग संस्थानों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए महंगी कोचिंग फीस का खर्च उठाना मुश्किल हो जाता है। विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म इस समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकता है। केंद्रीय मंत्री ने उम्मीद जताई कि ऑनलाइन कोचिंग की यह पहल आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने इसे बदलते दौर की शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप एक उपयोगी कदम बताया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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