उदयपुर पहुंची लोकमंथन यात्रा, लोक संस्कृति और ‘हम भारत के लोग’ विषय पर हुआ संवाद

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उदयपुर पहुंची लोकमंथन यात्रा, लोक संस्कृति और ‘हम भारत के लोग’ विषय पर हुआ संवाद


उदयपुर, 11 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान की लोक संस्कृति, परंपराओं, कलाओं और सामाजिक चेतना को जनजीवन से जोड़ने के उद्देश्य से निकाली जा रही लोकमंथन यात्रा रविवार को उदयपुर पहुंची। यात्रा के तहत संगोष्ठियों, व्याख्यानों, प्रदर्शनियों, नुक्कड़ नाटकों, लोकनृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों के जरिए लोक परंपराओं तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

अधिवक्ता परिषद और राजस्थान ह्यूमन रिसोर्सेज डेवलपमेंट फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में ‘हम भारत के लोग’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। इसमें मुख्य वक्ता संविधानविद् जसवंत खत्री ने कहा कि लोकमंथन यात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि लोकजीवन और लोक परंपराओं को समाज की मुख्यधारा में स्थापित करने का प्रयास है।

खत्री ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविध लोक परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक सहभागिता में निहित है। गांवों और स्थानीय समुदायों में पीढ़ियों से चली आ रही कलाओं, खेलों, परंपराओं और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। लोक संस्कृति को केवल उत्सवों तक सीमित रखने के बजाय उसे सामाजिक जीवन से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में प्रयुक्त ‘हम भारत के लोग’ वाक्यांश प्रत्येक नागरिक की राष्ट्र निर्माण में भागीदारी और जिम्मेदारी को दर्शाता है। देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोते हुए सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

इससे पहले यात्रा के विश्वविद्यालय परिसर पहुंचने पर कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा और अन्य अतिथियों ने यात्रा संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत, जसवंत खत्री, मीनू सहित यात्रा दल के सदस्यों का उपरना पहनाकर स्वागत किया।

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में विज्ञान भारती की ओर से आयुर्वेद, राजस्थानी लोकनृत्य और मेवाड़ में जल संरक्षण विषय पर प्रदर्शनियां लगाई गईं। युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति, लोक परंपराओं, विदेशी बाजार और स्त्री शिक्षा जैसे विषयों पर नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया।

महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सीटीएई परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भवाई लोकनृत्य, दिवेर युद्ध, पन्नाधाय के समर्पण और स्वत्वबोध पर आधारित नाटकों के साथ लोकगीतों तथा लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम में लोकजीवन और लोकदर्शन से जुड़े विषयों को भी अभिव्यक्ति दी गई।

यात्रा संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने कहा कि यात्रा के माध्यम से ‘हम भारत के लोग’ की अवधारणा के अर्थ और महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

भुवाणा चौराहे पर नगरवासियों ने थाली, मादल और ढोलक की थाप के साथ यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद मीरा कन्या महाविद्यालय में विद्वज्जनों ने यात्रा दल का स्वागत कर लोक संस्कृति से जुड़े विषयों पर परिचर्चा की। परिसर में अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ और संस्कार भारती की ओर से राजस्थानी संस्कृति एवं लोक परंपराओं पर प्रदर्शनी लगाई गई। इतिहास संकलन समिति ने जगदीश मंदिर, मोती मगरी, सहेलियों की बाड़ी, बागोर हवेली और गुलाब बाग के इतिहास पर आधारित प्रदर्शनी प्रस्तुत की।

डॉ. कुमावत ने बताया कि लोकमंथन यात्रा राजस्थान के 41 जिलों तक पहुंचेगी। यात्रा का तृतीय चरण आठ से 21 अक्टूबर तक निर्धारित है। पुष्कर से शुरू होकर अजमेर सहित विभिन्न जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरने वाली इस यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर स्थानीय संस्कृति, लोककला, शिक्षा, साहित्य, खेल और सामाजिक विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। तीसरे चरण का समापन 21 अक्टूबर को झालावाड़ जिले के गुरांडी में प्रस्तावित है।

प्रज्ञा प्रवाह की ओर से आयोजित मुख्य लोकमंथन कार्यक्रम चार से छह दिसंबर तक जयपुर के जवाहर कला केंद्र में होगा। इसमें देशभर के लोक कलाकारों, विचारकों और विद्वानों के शामिल होने की संभावना है।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

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