आयुर्वेद नाड़ी परीक्षण के लिए नाड़ी ज्ञान आवश्यक : प्रो. प्रजापति

आयुर्वेद नाड़ी परीक्षण के लिए नाड़ी ज्ञान आवश्यक : प्रो. प्रजापति
आयुर्वेद नाड़ी परीक्षण के लिए नाड़ी ज्ञान आवश्यक : प्रो. प्रजापति


जोधपुर, 02 अप्रैल (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर क्रिया शरीर विभाग द्वारा दो दिवसीय नाड़ी परीक्षण विषयक कार्यशाला मंगलवार को विवि के सभागार में शुरू हुई।

कुलपति प्रोफेसर (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने कार्यशाला के शुभारम्भ के अवसर पर कहा कि नाडी परीक्षण एकमात्र ऐसी विधा है जिसके द्वारा रोगी के दोष, धातु, मल की स्थिति का पता कर रोग की प्रकृति एवं विकृति का पता लगाकर सुव्यवस्थित चिकित्सा प्रबंधन किया जा सकता है, आयुर्वेदीय शास्त्रीय ग्रंथो में त्रिदोषों के आंकलन में नाड़ी परीक्षण का महत्व हैं, नाड़ी परीक्षण चिकित्सक के कौशल पर अत्यधिक निर्भर हैं। आयुर्वेद के सन्दर्भ में नाड़ी ज्ञान का वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण करने के लिए युगानुरूप में अनुसन्धान की आवश्यकता है। कार्यशाला के प्रथम दिन मुंबई के पूर्व प्रोफेसर डॉ. विनायक विट्टल तायड़े ने अपने व्याख्यान में कहा कि नाड़ी परीक्षण का आयुर्वेदिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण स्थान है। इस परीक्षा में वैज्ञानिक तकनीक का प्रयोग न केवल रोग का निदान करने में मदद करता है, बल्कि यह व्यक्ति के प्रकृति, विकृति और दोष स्थिति का भी विश्लेषण करता है। यह दोष (वात, पित्त कफ) की प्रकृति और उनके विकृतियों को पहचानने में मदद करती है। नाड़ी परीक्षा से व्यक्ति को उचित आहार, व्यायाम और जीवन शैली की सलाह दे सकते है। प्रो. विट्टल ने नाड़ी परीक्षा की विधि का प्रायोगिक प्रशिक्षण देते हुए कहा कि सुबह का समय नाड़ी परीक्षा करने के लिए उत्तम माना जाता है। रुग्ण को शांत, स्वच्छ कक्ष में बिठाकर नाड़ी को उचित विधि से पकडक़र सूक्ष्म विवेचन करना चाहिये। नाड़ी परीक्षा के समय नाड़ी तालिका, मुंडरा, गुणमाला आदि का प्रयोग करना चाहिये। कुलसचिव प्रो. गोविन्द सहाय शुक्ल ने नाडी परीक्षण के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि बीएएमएस के प्रथम वर्ष से ही विद्यार्थियों को नाडी परीक्षण सम्बन्धी प्रशिक्षण देना चाहिए जिससे उच्च गुणवत्ता की दक्षता एवं कौशल प्राप्त हो सके।

देशभर से आए आयुर्वेद विशेषज्ञ

कार्यशाला के आयोजन सचिव एवं मीडिया प्रभारी डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का परिचय देते हुए बताया कि महानगर आयुर्वेद सेवा संघ, नासिक के सहयोग से इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा हैं, जिसमें आयुर्वेद एवं नाड़ी विशेषज्ञ केजीएमपी आयुर्वेद महाविद्यालय, मुंबई के पूर्व प्रोफेसर डॉ. विनायक विट्टल तायड़े एवं डॉ. खुशबू पाम्परा ने शास्त्रीय संदर्भों के अनुरूप अतिथि व्याख्यान एवं प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया। नाड़ी तालिका की स्थिति, गति और उसकी विभिन्न ध्वनियां का विश्लेषण करना चाहिये। उद्घाटन कार्यक्रम में प्राचार्य एवं कार्यशाला आयोजन अध्यक्ष प्रो. महेन्द्र कुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि यह कार्यशाला स्नातकोत्तर छात्रों के लिए चिकित्सा कार्य में उपयोगी साबित होगी।

पहले दिन यह रहे उपस्थित

इस अवसर पर स्नातकोत्तर द्रव्यगुण विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. चन्दन सिंह, छात्र कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. गोविन्द प्रसाद गुप्ता, प्रो. नीलिमा रेड्डी, परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजाराम अग्रवाल, फार्मेसी निदेशक डॉ. विजयपाल त्यागी, सीएचआरडी निदेशक डा राकेश शर्मा, आईआईटी जोधपुर की प्रोफेसर मिताली मुखर्जी, पंचकर्म विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानप्रकाश शर्मा, योग साधना केन्द्र के प्रभारी डॉ. चन्द्रभान शर्मा, डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. मोनिका वर्मा, डॉ. विष्णु दत्त शर्मा, टीचर्स वेलफेयर एसोसियेशन के अध्यक्ष डॉ. श्योराम शर्मा, डॉ. ब्रह्मानंद शर्मा, डॉ. दिनेश कुमार राय, डॉ. मनीषा गोयल, डॉ. अरुण दाधीच, कार्यशाला के कोर्डिनेटर डॉ. पूजा पारीक, डॉ. हेमंत एवं सदस्य डॉ. अनीश, डॉ. रमेश, डॉ. वर्षा एवं समस्त विभागो के स्नातकोत्तर अध्येता, क्रिया शारीर विभाग के स्नातकोत्तर अध्येता उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार/सतीश/ईश्वर

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