पानी की टंकी का ट्यूबवेल खराब, पानी को तरसे आधा दर्जन गांवों के 15 हजार से अधिक लोग

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पानी की टंकी का ट्यूबवेल खराब, पानी को तरसे आधा दर्जन गांवों के 15 हजार से अधिक लोग


जयपुर, 27 अप्रैल (हि.स.)। जयपुर शहर के आसपास के ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। जलदाय विभाग द्वारा आमजन को पानी उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए ट्यूबवेल और टंकियां देखरेख के अभाव में बंद पड़ी हैं, जिससे गोनेर रोड क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों के 15 हजार से ज्यादा लोग भीषण गर्मी में पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।

शहर के विस्तार के साथ कई गांवों को नगर निगम सीमा में शामिल कर लिया गया, लेकिन इसके बाद ट्यूबवेलों की देखरेख और संचालन को लेकर जलदाय विभाग और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय नहीं बन पाया। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर पानी की मोटर खराब पड़ी है या बिजली बिल जमा नहीं होने के कारण कनेक्शन कट गए हैं, जिससे जल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। भीषण गर्मी के इस दौर में, जब तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है, पेयजल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। प्रभावित क्षेत्रों में जगतपुरा के आसपास स्थित चतरपुरा, दांतली, सिरोली, गोनेर, रिक्शा मुरलीपुरा और जीरोता सहित कई गांव शामिल हैं, जहां ट्यूबवेलों के माध्यम से पहले पानी की आपूर्ति की जाती थी।

इन गांवों में पंचायत और जलदाय विभाग द्वारा सिंगल फेज मोटर के साथ ट्यूबवेल स्थापित किए गए थे, ताकि स्थानीय लोग अपनी जरूरत के अनुसार पानी प्राप्त कर सकें। लेकिन समय पर मरम्मत और रखरखाव नहीं होने से कई जगहों पर मोटर, टंकियां और अन्य उपकरण खराब हो चुके हैं। कुछ स्थानों पर ट्यूबवेल से उपकरणों की चोरी की घटनाएं भी सामने आई हैं। स्थानीय निवासियों ने कई बार नगर निगम, ग्राम विकास अधिकारियों और जलदाय विभाग को समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका। विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं, जिससे आमजन की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

दांतली निवासी प्रदीप शर्मा ने बताया कि दांतली, चतरपुरा और सिरोली में सरकारी मोटर लंबे समय से खराब पड़ी हैं। इसके चलते लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है, जो गर्मी के मौसम में बेहद कठिन हो गया है।

इस संबंध में जलदाय विभाग के जयपुर ग्रामीण अधीक्षण अभियंता हिमांशु चौधरी ने बताया कि जिन ट्यूबवेलों का निर्माण विभाग द्वारा किया गया था, उनकी देखरेख की जा रही है, जबकि पंचायत स्तर पर स्थापित ट्यूबवेलों का संचालन पहले स्थानीय निकायों द्वारा किया जाता था। उन्होंने कहा कि संबंधित क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल किए जाने के बाद ट्यूबवेलों का हस्तांतरण विभाग को नहीं किया गया, जिसके कारण दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में नगर निगम को पत्र लिखकर समाधान की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि निवारू क्षेत्र में भी इसी प्रकार की समस्या सामने आई थी, जिसे बाद में जलदाय विभाग द्वारा सुलझा लिया गया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश

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