खनिज के मलबे में छिपा अरबों का खजाना! राजस्थान में मिले निकेल-कोबाल्ट के संकेत
जयपुर, 10 जून (हि.स.)। राजस्थान की खदानों से निकले बेकार समझे जाने वाले खनिज मलबे अब देश की सामरिक और आर्थिक ताकत बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में किए जा रहे अभिनव अध्ययन में पिंक और ग्रीन मार्बल के डम्प्स में निकेल, कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम जैसे बहुमूल्य क्रिटिकल मिनरल्स की मौजूदगी के मजबूत संकेत मिले हैं।
ये वही खनिज हैं जिनकी जरूरत रक्षा उपकरणों, इलेक्ट्रिक वाहनों, ग्रीन एनर्जी, एयरोस्पेस और एयरोनॉटिकल उद्योगों में सबसे अधिक होती है।
ऐसे में राजस्थान की यह उपलब्धि देश की ऊर्जा, आर्थिक और सामरिक सुरक्षा को नई मजबूती दे सकती है।
खान विभाग के अधीन राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (आरएसएमईटी) और आईआईटी आईएसएम धनबाद के बीच हुए समझौते के तहत प्रदेशभर में खनिज डम्प्स का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। उद्देश्य उन खनिज ढेरों का पुनर्चक्रण करना है जिन्हें अब तक अनुपयोगी माना जाता था।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत 78 खनिज डम्प्स चिन्हित किए गए हैं।
इनमें उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों के 10 डम्प्स का अध्ययन किया गया, जिनमें पिंक मार्बल के 8 और ग्रीन मार्बल के 2 डम्प्स शामिल हैं।
प्रारंभिक अध्ययन में इन डम्प्स में निकेल, कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम की मात्रा पृथ्वी की सतह में सामान्य रूप से उपलब्ध मात्रा की तुलना में 25 से 40 गुना तक अधिक पाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक स्तर पर इन खनिजों का उत्पादन संभव होने पर यह क्षेत्र नई औद्योगिक क्रांति का आधार बन सकता है।
खान विभाग अब शेष 68 डम्प्स और टेलिंग्स का भी वैज्ञानिक मूल्यांकन करा रहा है। अध्ययन में जियो-रेफरेंस्ड डेटाबेस, मैपिंग, सैंपलिंग और मिनरालॉजिकल विश्लेषण के माध्यम से टंगस्टन, लिथियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई), कोबाल्ट और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता का आकलन किया जाएगा।
उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर, अजमेर, ब्यावर, नागौर, सिरोही, जोधपुर और जालौर सहित कई जिलों में ऐसे खनिज डम्प्स पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत देश में क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की खोज और खनन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राजस्थान ने इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए खनिज मलबे से ही इन महत्वपूर्ण खनिजों की खोज का अभिनव मॉडल विकसित किया है।
हाल ही में बाड़मेर जिले के सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में भी रेयर अर्थ और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स के बड़े भंडार मिलने के बाद राजस्थान देश के खनिज मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

