पिकअप खाई में गिरी, यूपी-जयपुर के तीन मजदूरों की मौत

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पिकअप खाई में गिरी, यूपी-जयपुर के तीन मजदूरों की मौत


पिकअप खाई में गिरी, यूपी-जयपुर के तीन मजदूरों की मौत


भीलवाड़ा, 27 मई (हि.स.)। राजस्थान-मध्यप्रदेश सीमा पर स्थित भीलवाडा जिले का तिलस्वां घाट एक बार फिर भीषण सड़क हादसे का गवाह बन गया। मंगलवार देर रात धौलपुर से बांसवाड़ा जा रही मजदूरों से भरी एक पिकअप अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर ही तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद कोटा रेफर किया गया है।

घटना सिंगोली थाना क्षेत्र में स्थित तिलस्वां घाट के खतरनाक मोड़ पर हुई। बताया जा रहा है कि पिकअप में पेंट और पुट्टी की भारी बाल्टियां भरी हुई थीं। उन्हीं बाल्टियों के ऊपर मजदूर बैठे हुए थे। देर रात घाट के तीखे मोड़ पर चालक अचानक संतुलन खो बैठा और वाहन सीधे गहरी खाई में जा गिरा। हादसे के बाद चालक मौके से फरार बताया जा रहा है।

दुर्घटना के बाद घाट क्षेत्र में चीख-पुकार मच गई। राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया तथा पुलिस को सूचना दी। खाई में गिरी पिकअप में फैला पेंट और पुट्टी मजदूरों के शरीर पर पूरी तरह चिपक गया था, जिससे घटनास्थल का दृश्य बेहद दर्दनाक और भयावह नजर आ रहा था।

सिंगोली थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा ने बताया कि मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के बरेली, गाजीपुर तथा राजस्थान के जयपुर निवासी मजदूरों के रूप में हुई है। ये सभी बांसवाड़ा में आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण और पुताई कार्य के लिए जा रहे थे। पुलिस मृतकों के परिजनों को सूचना देने के लिए अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क कर रही है। हादसे में गंभीर रूप से घायल मोहम्मद जाकिर, मोहम्मद इदरीस और सोमपाल को पहले सिंगोली अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत गंभीर होने पर कोटा रेफर कर दिया गया।

घटना की सूचना मिलते ही सिंगोली थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा, तहसीलदार प्रेमशंकर पटेल तथा पुलिस बल मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से घंटों मशक्कत कर शवों और घायलों को खाई से बाहर निकाला गया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर जांच शुरू कर दी है।

उल्लेखनीय है कि तिलस्वां घाट पर तीन दिन के भीतर यह दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले रविवार को इसी घाट पर शिवशक्ति ट्रेवल्स की निजी बस खाई में गिर गई थी, जिसमें 32 यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे। लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि तिलस्वां घाट लंबे समय से जर्जर और जानलेवा बना हुआ है, लेकिन प्रशासन ने अब तक यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए। घाट पर न तो पर्याप्त चेतावनी संकेत हैं और न ही मजबूत सुरक्षा रेलिंग। लगातार हादसों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी गंभीर नजर नहीं आ रहे। क्षेत्रवासियों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाते तो कई मासूम जानें बचाई जा सकती थीं। अब सवाल यही उठ रहा है कि आखिर तिलस्वां घाट की खतरनाक तस्वीर कब बदलेगी, या फिर इसी तरह बेगुनाह राहगीरों की जान जाती रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद

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