रणथंभौर में बाघिन ‘शक्ति’ ने किया मगरमच्छ का शिकार

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रणथंभौर में बाघिन ‘शक्ति’ ने किया मगरमच्छ का शिकार


सवाई माधाेपुुर, 05 अप्रैल (हि.स.)। सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व में रविवार सुबह एक दुर्लभ और रोमांचक घटना देखने को मिली। यहां सात वर्षीय बाघिन टी-111 (शक्ति) ने एक मगरमच्छ का शिकार कर वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों को हैरान कर दिया।

जानकारी के अनुसार, यह घटना सुबह जोन नंबर चार के जामुन देह क्षेत्र में सफारी के दौरान हुई। बाघिन शक्ति तालाब के किनारे घात लगाकर बैठी थी। जैसे ही मगरमच्छ पानी से बाहर निकलकर किनारे आया, बाघिन ने अचानक हमला बोल दिया और उसे अपने मजबूत जबड़ों में जकड़ लिया।

करीब 10 मिनट तक चले इस संघर्ष में मगरमच्छ को संभलने का मौका तक नहीं मिला और अंततः वह मारा गया। इसके बाद बाघिन उसे घसीटते हुए चट्टानों पर ले गई और फिर जंगल की ओर ले जाती दिखाई दी।

इस पूरे घटनाक्रम को मौजूद पर्यटकों ने अपने कैमरों में कैद कर लिया।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मगरमच्छ को पानी का खतरनाक शिकारी माना जाता है, ऐसे में उसका बाघिन के हाथों शिकार होना बेहद दुर्लभ घटना है। आमतौर पर बाघ इतने बड़े मगरमच्छ का शिकार कम ही करते हैं, जिससे यह दृश्य और भी खास बन गया।

इस घटना ने एक बार फिर रणथंभौर की मशहूर बाघिन मछली की याद ताजा कर दी, जिसने करीब दो दशक पहले अपने शावकों की रक्षा करते हुए मगरमच्छ का शिकार किया था।

अपनी बहादुरी के कारण मछली को ‘लेडी ऑफ द लेक’ और ‘क्रोकोडाइल किलर’ जैसे नाम मिले थे।

बताया जाता है कि शक्ति, मछली की वंशज है और उसकी बेटी कृष्णा (टी-19) की संतान रही है। रणथंभौर में आज भी करीब 60 फीसदी बाघों में मछली का वंश पाया जाता है। इस रोमांचक घटना ने एक बार फिर रणथंभौर को वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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