बाइक सवार तीन युवकों को ट्रेलर ने कुचला

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बाइक सवार तीन युवकों को ट्रेलर ने कुचला


सिरोही, 21 मई (हि.स.)। जिले के अनादरा थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह नेशनल हाईवे-168 पर हुए भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार तीन युवकों की मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि टक्कर लगते ही तीनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे और मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों में एक युवक की तीन दिन बाद शादी होने वाली थी। वह अपने चचेरे भाई और रिश्तेदार के साथ शादी का सामान खरीदकर घर लौट रहा था।

हादसा गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे डबानी मोड़ के पास हुआ। सीआई कमलेश गहलोत ने बताया कि तीनों युवक बाइक पर सवार होकर रेवदर से अनादरा की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्रेलर ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों युवक उछलकर सड़क पर जा गिरे। हादसे में नरमा गरासिया (24) पुत्र बाबू गरासिया, गोविंद गरासिया (28) पुत्र साहेबा गरासिया और रमेश गरासिया (24) पुत्र छोगा गरासिया निवासी खरुआड़ा गांव की मौके पर ही मौत हो गई।

मृतक गोविंद के भाई अर्जुन ने बताया कि नरमा की रविवार को शादी होने वाली थी और शुक्रवार को गणपति स्थापना का कार्यक्रम रखा गया था। तीनों युवक करोटी से शादी का सामान खरीदकर गांव लौट रहे थे। नरमा और गोविंद चचेरे भाई थे, जबकि रमेश रिश्ते में नरमा का मामा लगता था। घर में जहां शादी की खुशियों का माहौल था, वहीं इस हादसे की खबर पहुंचते ही पूरे गांव में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

हादसे के बाद ट्रेलर चालक वाहन लेकर मौके से फरार होने लगा, लेकिन ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए करीब दो किलोमीटर तक उसका पीछा किया और ट्रेलर को रुकवा लिया।

हालांकि मौका मिलते ही चालक वहां से फरार हो गया। ग्रामीण भंवर देवड़ा ने बताया कि ट्रेलर को रुकवाने में डबानी गांव के युवाओं ने अहम भूमिका निभाई। ये युवा रेवदर उपखंड में हाईवे आंदोलन संघर्ष समिति से जुड़े हुए हैं, जो लंबे समय से एनएच-168 पर बाइपास निर्माण की मांग कर रहे हैं।

दुर्घटना के बाद हाईवे पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और करीब आधे घंटे तक यातायात बाधित रहा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से शवों को अनादरा अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया और यातायात सुचारु कराया। मृतक नरमा की दो साल की बेटी भी है।

दरअसल गरासिया जनजाति में ‘ताणना प्रथा’ प्रचलित है। इस परंपरा के तहत युवक-युवती एक-दूसरे को पसंद कर परिवार की सहमति से साथ रहने लगते हैं। जब उनके यहां संतान हो जाती है, तब समाज उस रिश्ते को औपचारिक विवाह के योग्य मानता है। इसी परंपरा के तहत अब नरमा की शादी होने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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