निकाय चुनाव में तीसरा मोर्चा तैयार: कई वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

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निकाय चुनाव में तीसरा मोर्चा तैयार: कई वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार


जयपुर, 27 अगस्त (हि.स.)। प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी मुकाबला तेज होने के साथ ही तीसरे मोर्चे के दलों ने भी चुनावी तैयारियां बढ़ा दी हैं। भारतीय आदिवासी पार्टी (बाप), राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी), बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), आम आदमी पार्टी (आप) और राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। क्षेत्रीय दलों की मौजूदगी से कई वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के परंपरागत समीकरण प्रभावित होने की संभावना है।

निकाय चुनाव में वार्ड स्तर पर प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़, जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दे अहम रहते हैं। सड़क, सफाई, पेयजल, सीवरेज, कचरा निस्तारण और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के अलावा भाजपा-कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने वाले असंतुष्ट दावेदार भी तीसरे मोर्चे के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

वागड़ में बाप का फोकस

भारतीय आदिवासी पार्टी ने बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर और सलूंबर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की रणनीति तैयार की है। पार्टी स्थानीय समस्याओं, सुशासन और नागरिक सुविधाओं के मुद्दों के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में है। बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत के अनुसार निकाय चुनाव में संगठन का विस्तार और पार्टी का आधार मजबूत करना मुख्य उद्देश्य है। जहां जनाधार मजबूत होगा,वहां प्रत्याशी उतारे जाएंगे।

41 निकायों पर आरएलपी की नजर

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी पश्चिमी राजस्थान में सक्रियता बढ़ा रही है। पार्टी की नजर नागौर, डीडवाना-कुचामन, अजमेर, जोधपुर, बाड़मेर, पाली, बीकानेर, चूरू और सीकर सहित करीब 41 निकायों पर है। पार्टी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल कार्यकर्ताओं से फीडबैक ले रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष उम्मेदाराम बेनीवाल के अनुसार चुनाव को लेकर संगठन के पास आवेदन आए हैं और जल्द ही राष्ट्रीय अध्यक्ष स्तर पर प्रत्याशियों के नामों पर निर्णय होगा।

जयपुर में करीब 100 वार्डों पर आप की नजर

आम आदमी पार्टी भी निकाय चुनाव के जरिए राजस्थान में संगठन विस्तार की तैयारी में है। पार्टी का फोकस जयपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, जोधपुर, अलवर, पाली और भरतपुर सहित प्रमुख शहरों पर है। जयपुर में करीब 100 वार्डों में मजबूत प्रत्याशी उतारने की तैयारी है। पार्टी ने प्रदेश में 1000 से अधिक प्रत्याशियों को मैदान में उतारने का लक्ष्य रखा है। आप के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र शास्त्री के अनुसार पार्टी उन्हीं क्षेत्रों में चुनाव लड़ेगी, जहां संगठन और जनाधार मजबूत है।

पूर्वी राजस्थान में बीएसपी-आरएलडी सक्रिय

बहुजन समाज पार्टी ने भरतपुर, धौलपुर, करौली और अलवर में अपना आधार मजबूत करने पर जोर दिया है। पार्टी दलित और वंचित वर्ग से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देते हुए अधिक से अधिक सीटों पर अपने चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। बीएसपी प्रदेशाध्यक्ष भगवान सिंह के अनुसार मजबूत और समर्पित उम्मीदवार मिलने वाले क्षेत्रों में पार्टी पूरी तैयारी के साथ चुनाव लड़ेगी।

वहीं राष्ट्रीय लोकदल की नजर भरतपुर, डीग-कुम्हेर, नगर, कामां और नदबई सहित आसपास के क्षेत्रों पर है। पार्टी चुनाव चिह्न के उपयोग को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग की मंजूरी का इंतजार कर रही है। मंजूरी के बाद उम्मीदवारों की घोषणा की जाएगी।

बागियों से बदल सकता है चुनावी गणित

निकाय चुनाव में तीसरे मोर्चे के लिए भाजपा-कांग्रेस के असंतुष्ट दावेदार महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं। टिकट वितरण के बाद दोनों दलों से नाराज होकर चुनाव मैदान में उतरने वाले मजबूत स्थानीय नेता यदि क्षेत्रीय दलों का रुख करते हैं तो कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है।

विधानसभा चुनाव की तुलना में निकाय चुनाव में कुछ सौ मतों का अंतर भी परिणाम बदल सकता है। ऐसे में वागड़ में बाप, पश्चिमी राजस्थान में आरएलपी, पूर्वी राजस्थान में बीएसपी-आरएलडी और प्रमुख शहरों में आप की सक्रियता भाजपा-कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकती है। आखिरकार स्थानीय मुद्दे, जातीय समीकरण और प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ ही तीसरे मोर्चे की वास्तविक ताकत तय करेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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