परकोटे में दिखी 208 साल पुरानी 'हेड़े की परिक्रमा' की रंगत

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परकोटे में दिखी 208 साल पुरानी 'हेड़े की परिक्रमा' की रंगत


जयपुर, 16 सितंबर (हि.स.)। गुलाबी नगरी के परकोटे में बुधवार को भक्ति और रियासतकालीन परंपरा की अद्भुत जुगलबंदी देखने को मिली। अवसर था 208 वर्ष पुरानी श्री गोपालजी महाराज की ऐतिहासिक 'हेड़े की परिक्रमा' का। सुबह सादगी के साथ शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन ढलती शाम के साथ भव्य राजसी शोभायात्रा में तब्दील हो गया।

श्री शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के पावन सान्निध्य में परिक्रमा का शुभारंभ गोपाल जी का रास्ता स्थित श्री नृसिंह जी के मंदिर से हुआ। सफेद धोती-कुर्ता और मोतिया रंग की पारंपरिक पगड़ी पहने सैकड़ों श्रद्धालु भजनों की स्वर लहरियों और जयकारों के साथ पैदल आगे बढ़ते रहे। परिक्रमा मार्ग में आने वाले सभी प्रमुख देवालयों में ठाकुरजी के दर्शन और भजन-कीर्तन का क्रम अनवरत चलता रहा।

घाट की गूणी स्थित फतेह चंद्रमाजी मंदिर में चार बालकों को गोपाल जी, राधाजी, ललिता और विशाखा का स्वरूप देकर बहुमूल्य आभूषणों व विशेष पोशाक से सजाया गया। इसके पश्चात इन्हें दो चांदी की पालकियों में विराजमान किया गया।

सांगानेरी गेट से इस यात्रा ने विशाल शोभायात्रा का रूप ले लिया। सबसे आगे हाथी, घोड़े, ऊंटों का लवाजमा, शहनाई की धुनें और बैंड-बाजे चल रहे थे। मार्ग में सड़क के दोनों ओर खड़े शहरवासियों ने पुष्प वर्षा कर ठाकुरजी के दर्शन किए और जगह-जगह यात्रा का स्वागत हुआ।

यह पारंपरिक परिक्रमा सांगानेरी गेट, धूलेश्वर महादेव मंदिर, हाथी बाबू का बाग, नाहरी का नाका स्थित पंचमुखी हनुमानजी, धूलकोट, गढ़ गणेश, नहर के गणेशजी, धोती वालों की बगीची, बद्री नारायणजी की डूंगरी और लाल डूंगरी स्थित कल्याणजी व घाट के बालाजी होते हुए पावन तीर्थ गलताजी पहुंची। गलताजी में श्रद्धालुओं ने स्नान और विश्राम किया।

जौहरी बाजार, बड़ी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार और चौड़ा रास्ता से होती हुई गणगौर के रास्ते से गोपालजी के रास्ता स्थित निज मंदिर पहुंची, जहां आरती के साथ 208 साल पुरानी यह परंपरा विधिवत संपन्न हुई।

आयोजन के दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम रहे। पांच थानों की पुलिस और निजी सुरक्षाकर्मियों की टीम पूरे परिक्रमा मार्ग में मुस्तैद नजर आई।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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