टेक्सटाइल फैक्ट्रियों को बंद करने पर श्रमिकों का प्रदर्शन

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टेक्सटाइल फैक्ट्रियों को बंद करने पर श्रमिकों का प्रदर्शन


जोधपुर, 01 जून (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद टेक्सटाइल फैक्ट्रियों को बंद किए जाने पर श्रमिकों ने आज कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर के मार्फत मुख्यमंत्री को बंद टेक्सटाइल फैक्ट्रियों को वापस शुरू करने की मांग को लेकर एक ज्ञापन प्रेषित किया।

ज्ञापन में बताया गया कि जोधपुर का टेक्सटाइल उद्योग वर्तमान में पूर्णत: बंद है, जिससे इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों के समक्ष आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। टेक्सटाइल उद्योग जोधपुर की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है तथा इससे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग सात लाख से अधिक परिवारों का जीवनयापन जुड़ा हुआ है।

वर्तमान परिस्थितियों में सभी टेक्सटाइल इकाइयां बंद हैं। ऐसी स्थिति में यदि किसी क्षेत्र में रंगयुक्त अथवा प्रदूषित पानी मिलने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, तो उसके वास्तविक स्रोत की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच करवाना अत्यंत आवश्यक है। जब उद्योग की सभी इकाइयों बंद हैं, तब बिना पर्याप्त जांच के सम्पूर्ण टेक्सटाइल उद्योग को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा।

उद्योग बंद होने के कारण हजारों मजदूर, कर्मचारी, कारीगर, ट्रांसपोर्टर, छोटे व्यापारी एवं उनसे जुड़े अन्य व्यवसाय आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। अनेक परिवारों के सामने रोजगार एवं दैनिक जीवन-यापन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। इसके अतिरिक्त उद्योग बंद रहने से जोधपुर के निर्यात कारोबार, स्थानीय व्यापार तथा सरकारी राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ज्ञापन में बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न आदेशों में एसटीपी एवं सीईटीपी दोनों के उपचारित जल के पुन: उपयोग पर बल दिया है, न कि केवल सीईटीपी के जल के पुन: उपयोग पर।

वर्तमान में प्रशासन द्वारा केवल सीईटीपी से जुड़े उद्योगों पर दबाव बनाया जा रहा है, जबकि एसटीपी का उपचारित एवं अनुपचारित जल, जो जोजरी नदी में प्रवाहित होकर जलभराव एवं प्रदूषण का प्रमुख कारण है, उस पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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