कार्तिक मास में दीपदान से जगमगाए छोटी काशी के मंदिर

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कार्तिक मास में दीपदान से जगमगाए छोटी काशी के मंदिर


जयपुर, 31 अक्टूबर (हि.स.)। कार्तिक मास के पावन अवसर पर धार्मिक गुलाबी नगरी जयपुर के मंदिरों में भक्ति, श्रद्धा और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। भगवान श्रीहरि विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना के विशेष महत्व वाले इस महीने में शहर के प्रमुख मंदिरों में दीपदान के विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। सुबह मंगला आरती से ही आराध्य देव गोविंद देव जी मंदिर सहित अनेक देवालयों में दीपों की रोशनी से आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की चहल-पहल और भजन-कीर्तन की मधुर स्वर लहरियां माहौल को भक्तिमय बना रही हैं। इस विशेष कार्तिक मास में दीपदान की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी मान्यता के चलते श्रद्धालु सुबह और शाम मंदिरों में पहुंचकर दीप प्रज्वलित कर रहे हैं। गोविंद देव जी मंदिर में भगवान के दर्शन के साथ दीपदान कर भक्त परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। दीपों की कतारें मंदिरों की सुंदरता को और बढ़ा रही हैं। कई मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से कार्तिक मास की महिमा को जीवंत किया जा रहा है।

ज्योतिष विद्वान पंडित अनिल कुमार विद्रोही के अनुसार कार्तिक मास को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दौरान तुलसी पूजन, भगवान विष्णु की पूजा, दीपदान और धार्मिक कथाओं के श्रवण का विशेष महत्व रहता है। श्रद्धालु घरों के साथ मंदिरों में भी तुलसी के समीप दीपक जलाकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मान्यता है कि कार्तिक मास में श्रद्धापूर्वक किया गया दीपदान जीवन में सकारात्मकता, सुख और शांति का संदेश देता है।

भक्तों के अनुसार शहर के विभिन्न मंदिरों में धार्मिक आयोजनों के चलते उत्सव जैसा माहौल है। कहीं संकीर्तन हो रहा है तो कहीं भगवान के विशेष श्रृंगार और आरती के दर्शन श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और युवा बड़ी श्रद्धा के साथ इन आयोजनों में भाग ले रहे हैं। शाम के समय दीपदान के दौरान मंदिरों में दिखाई देने वाला दृश्य श्रद्धालुओं के मन में विशेष आध्यात्मिक अनुभूति पैदा कर रहा है।

पंडित आर्यन शर्मा ने बताया कि कार्तिक मास के दीपदान आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये जयपुर की समृद्ध धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजने का माध्यम हैं। नई पीढ़ी भी परिवार के साथ मंदिरों में पहुंचकर इन परंपराओं से जुड़ रही है। दीपों की जगमगाहट के बीच श्रद्धालुओं की प्रार्थनाएं और भक्ति भाव यही संदेश दे रहे हैं कि भारतीय संस्कृति में प्रकाश केवल अंधकार दूर करने का प्रतीक नहीं, बल्कि ज्ञान, सद्भाव, सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना का भी प्रतीक है। इस तरह कार्तिक मास में दीपदान के आयोजनों ने पूरे जयपुर को भक्तिरस में सराबोर कर दिया है। पूरे कार्तिक मास में इस तरह के आयोजन जयपुर शहर में विशेष होते हैं। भक्त लोग सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जागकर मंगला आरती से शयन आरती तक पूरे आयोजनों में भाग ले रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

Livevns.news Desk
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