तकनीकी रूप से दक्ष बनेंगे उर्वरक विक्रेता
जोधपुर, 29 जून (हि.स.)। कृषि विश्वविद्यालय के किसान कौशल विकास केंद्र की ओर भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन 19 के अनुसार पहली बार मुख्यालय पर 15 दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में अध्यक्षता कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह जैतावत ने की।
इस मौके पर उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में खेतों में अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का उपयोग किया जा रहा है, किसानों को उचित जानकारी ना होने से खेतों में आवश्यकता से बढक़र उर्वरकों का उपयोग हो रहा है, जिससे न सिर्फ धरती की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरे उत्पन्न हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि किसान खेती संबंधित सलाह लेने के लिए सर्वप्रथम विक्रेता के पास आता है, ऐसे में विक्रेता की जिम्मेदारी बनती है कि वह खुद भी इस कोर्स को निष्ठा पूर्वक पूरा कर उचित जानकारी रखें एवं किसान को भी बेहतरीन सलाह देवें।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को कहा कि किसानों को मिट्टी व जल की जांच के लिए प्रेरित करें, ताकि किसान संतुलित व आवश्यकता अनुसार उर्वरकों का इस्तेमाल करें। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन कसान कौशल विकास केंद्र के प्रभारी डॉ प्रदीप पगारिया ने दिया। उन्होंने बताया इस कोर्स का उद्देश्य खुदरा विक्रेताओं को वैज्ञानिक कृषि, मिट्टी के स्वास्थ्य प्रबंधन और उर्वरकों के संतुलित उपयोग का तकनीकी ज्ञान प्रदान करना है। ताकि वे किसानों को सही और प्रामाणिक सलाह दे सके।
समारोह के दौरान केकेवीके नोडल अधिकारी, डॉ प्रियंका स्वामी ने आभार जताया। कार्यक्रम के दौरान पाली, नागौर, भीलवाड़ा, कुचामन, फलोदी, जैसलमेर, बालोतरा सहित अन्य जिलों के आये प्रशिक्षणार्थियों की मौजूदगी रही। कार्यक्रम में प्रशिक्षण अधिकारी डॉ मनीष बेड़ा, नीलिमा मकवाना, डॉ प्रियंका, अनिल यादव व तकनीकी सहायक नरहरि जोशी की मौजूदगी रही।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

