विधिक सेवा प्राधिकरण : जोधपुर के स्कूलों में जज बने टीचर, साइबर सुरक्षा के दिए टिप्स

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विधिक सेवा प्राधिकरण : जोधपुर के स्कूलों में जज बने टीचर, साइबर सुरक्षा के दिए टिप्स


ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे का आगाज

जोधपुर, 07 अप्रैल (हि.स.)। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अनूठी पहल के तहत मंगलवार से प्रदेशभर के स्कूलों में युवा सशक्तीकरण कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है। इस अभियान को ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे नाम दिया गया है। इसके तहत जोधपुर महानगर के 50 न्यायिक अधिकारियों सहित पूरे राजस्थान के करीब 1400 जज और मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारियों ने क्लासरूम की कमान संभाली।

शिक्षा के मंदिरों में अब अदालत के हाकिम स्टूडेंट्स को साइबर सुरक्षा और उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इस वृहद कार्यक्रम का लक्ष्य प्रदेश के 1400 विद्यालयों के 4 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित करना है।

जोधपुर में इस कार्यक्रम को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश दिनेश त्यागी के निर्देशन में लागू किया गया है। मदेरणा कॉलोनी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कार्यक्रम के बाद डीएलएसए सचिव राकेश रामावत ने बताया कि विधिक सेवा का उद्देश्य लोगों को सस्ता, सुलभ न्याय और कानूनी जानकारी देना है। रामावत ने कहा कि आज के जमाने में कोई भी अज्ञानता को अपनी प्रतिरक्षा नहीं बना सकता, इग्नोरेंस ऑफ लॉ इज नो डिफेंस। उन्होंने बताया कि इंटरनेट की पहुंच आज सडक़ पर सफाई करने वाले तक है, जिसके कारण डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़े हैं और साइबर अपराधों में पिछले सालों की तुलना में 400 से 500 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी को रोकने के लिए अब हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को न्यायिक अधिकारी अलग-अलग स्कूलों में जाकर बच्चों को जागरूक करेंगे।

वहीं शास्त्री नगर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (विशिष्ठ पूर्व) में आयोजित कार्यक्रम में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीबीआई) अनुभव तिवाड़ी ने छात्रों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी।

अभियान की सबसे अहम और संवेदनशील पहल स्कूलों में कोर्ट वाली दीदी शिकायत पेटियों की स्थापना है। यह पहल खासतौर पर बालिकाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इन पेटियों में कोई भी छात्रा या छात्र अपनी किसी भी कानूनी समस्या, दुव्र्यवहार या उत्पीडऩ की शिकायत को बिना किसी डर के लिखकर डाल सकेंगे। इन शिकायतों को सीधे न्यायिक अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे बच्चों को न्यायपालिका तक अपनी बात पहुंचाने का एक सुरक्षित और सीधा मंच मिलेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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