‘टार्गेटेड फाइल सिस्टम’ के खिलाफ वकीलों को मिला समर्थन
जोधपुर, 02 सितम्बर (हि.स.)। राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था में पेंडिंग और सूचीबद्ध मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए अपनाई जा रही ‘टार्गेटेड/लिस्टेड फाइल सिस्टम’ व्यवस्था को लेकर अधिवक्ताओं का विरोध अब व्यापक रूप लेता जा रहा है। जोधपुर और जयपुर के बाद अब प्रदेश के कई जिलों की बार एसोसिएशन ने न्यायिक कार्यों से दूरी बनाते हुए हड़ताल का ऐलान कर दिया है।
जोधपुर की राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए संयुक्त अभ्यावेदन में लिस्टेड/टार्गेटेड मामलों के शीघ्र निस्तारण के दबाव के कारण न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की न्यायिक कार्यप्रणाली एवं पारित न्यायिक आदेशों की गुणवत्ता पर पड़ रहे संभावित प्रभाव पर गंभीर चिंता जताई गई है। बार एसोसिएशन द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन में तर्क दिया गया है कि किसी मामले का केवल लंबे समय से लंबित होना उसके तत्काल निस्तारण का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। प्रत्येक मामले में तथ्यों, साक्ष्यों, दस्तावेजों, लागू कानून और न्यायिक पहलुओं पर पर्याप्त विचार आवश्यक है। बार एसोसिएशनों ने अपने प्रतिवेदन में कहा है कि अलग-अलग मामलों की प्रकृति और जटिलता अलग होती है। ऐसे में केवल निर्धारित संख्या में मामलों के निस्तारण को न्यायिक कार्य की सफलता का आधार बनाना उचित नहीं है। बार ने जटिल, साक्ष्य-प्रधान और विस्तृत बहस वाले मामलों को केवल लक्ष्य पूरा करने के लिए जल्द निपटाने से न्याय की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई है।
वकीलों पर भी बढ़ रहा पेशेवर दबाव
बार एसोसिएशन के अनुसार टार्गेटेड मामलों की वजह से एक ही दिन में अलग-अलग न्यायालयों में बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई के लिए उपस्थित होना पड़ता है। इससे अधिवक्ताओं को प्रत्येक मामले के तथ्यों, दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की पर्याप्त तैयारी तथा प्रभावी बहस के लिए समय नहीं मिल पाता। अभ्यावेदन में यह भी कहा गया है कि लगातार बढ़ते कार्य-दबाव का असर अधिवक्ताओं के वर्क-लाइफ बैलेंस और पेशेवर जीवन पर पड़ रहा है।
तीन बड़ी मांगों पर दिया गया जोर
जोधपुर की दोनों प्रमुख हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से टार्गेटेड/लिस्टेड मामलों के शीघ्र निस्तारण से संबंधित जारी दिशा-निर्देशों एवं आदेशों पर पुनर्विचार करने, मामलों की संख्या तय करने के बजाय प्रत्येक न्यायालय की वास्तविक कार्यक्षमता और मामलों की प्रकृति को ध्यान में रखने और जटिल, साक्ष्य-प्रधान और विस्तृत बहस वाले मामलों को केवल लक्ष्य पूरा करने के उद्देश्य से जल्द निपटाने के लिए बाध्य नहीं करने की मांग की है। इसके साथ ही बार ने अधिवक्ताओं को प्रभावी पैरवी और पर्याप्त तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने की मांग करते हुए व्यावहारिक एवं संतुलित व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया गया है।
इन जिलों में भी मिला समर्थन
जोधपुर बार एसोसिएशन के हड़ताल पर जाने के बाद अब लगातार प्रदेशभर के बार एसोसिएशन भी इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। जोधपुर के बाद बाड़मेर बार एसोसिएशन के निर्णय के अनुसार अधिवक्ताओं ने न्यायिक संस्था की स्वतंत्रता, गरिमा और जनविश्वास की रक्षा के मुद्दे पर विचार-विमर्श के बाद 6 सितंबर तक न्यायिक कार्य से स्वैच्छिक रूप से दूर रहने का निर्णय लिया। वहीं डीआरटी बार एसोसिएशन जयपुर ने डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल, जयपुर के रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर बताया कि जयपुर एवं राजस्थान की अन्य बार एसोसिएशनों के आह्वान के समर्थन में 5 सितंबर तक न्यायिक कार्य से अनुपस्थित रहने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है। बुधवार को जालोर जिला बार के अधिवक्ताओं ने भी न्यायिक कार्य का बहिष्कार करते हुए न्यायिक कार्य नहीं किया। इसी तरह जिला बार एसोसिएशन ब्यावर ने 6 सितंबर तक और चित्तौडग़ढ़ बार ने 5 सितंबर तक न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

