आधुनिक विधि की चुनौतियों के बीच भारतीय विधि शास्त्र की प्रासंगिकता पर स्टडी सर्किल का आयोजन
जयपुर, 21 जुलाई (हि.स.)। अधिवक्ता परिषद राजस्थान, जयपुर प्रांत की उच्च न्यायालय इकाई ने आज स्थानीय परिसर स्थित आईआर लाइब्रेरी में एक महत्वपूर्ण स्टडी सर्किल का आयोजन किया। आधुनिक परिपेक्ष्य में भारतीय विधि शास्त्र की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित इस गहन चिंतन सत्र में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के धर्मशास्त्र विद्याशाखा एवं भारतीय विधिशास्त्र विद्याशाखा के विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्णा शर्मा ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की।
प्रो. शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय विधि शास्त्र केवल अपराधों की सजा और मुकदमेबाजी का संग्रह मात्र नहीं है, अपितु यह ऋण, धर्म, अर्थ और मोक्ष की अवधारणाओं पर आधारित एक समग्र जीवन-पद्धति है। उन्होंने पाश्चात्य विधि की पॉजिटिविज्म अवधारणा की तुलना भारतीय 'व्यवहार' परंपरा से करते हुए बताया कि जहाँ पश्चिम में 'अधिकार' (राइट्स) पर बल है, वहीं भारतीय दृष्टि में 'कर्तव्य' (धर्म) प्रधान है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करे तो अधिकारों का संरक्षण स्वतः हो जाता है। इस अवसर पर उन्होंने वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) को प्राचीन भारतीय ग्राम पंचायतों की सामूहिक न्याय प्रक्रिया से जोड़ते हुए कहा कि आज का 'मध्यस्थता' और 'समझौता' का मॉडल हजारों वर्ष पुराने हमारे 'प्राकृतिक न्याय' के सिद्धांतों पर ही आधारित है।
हालाँकि समय की कमी के कारण वे सभी नियोजित विषयों पर विस्तार से चर्चा नहीं कर सके, किन्तु उन्होंने पारिवारिक विधान (हिंदू उत्तराधिकार एवं विवाह संबंधी विसंगतियाँ), फौजदारी प्रक्रिया में साक्ष्य की अवधारणा, तथा पर्यावरण संरक्षण के भारतीय विधि-नियमों को संक्षिप्त रूप में रेखांकित किया। उनका स्पष्ट मानना था कि भारतीय विधिशास्त्र के मूल सिद्धांतों को अपनाकर ही वर्तमान न्यायिक बोझ को कम किया जा सकता है और पीड़ित को वास्तविक राहत दी जा सकती है।
गौरतलब है कि यह स्टडी सर्किल दिसंबर माह में जयपुर में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आयोजन 'लोकमंथन – भारत के लोग' को दृष्टिगत रखते हुए आयोजित किया गया। इसी कड़ी में विधि क्षेत्र के पेशेवर भारतीय दृष्टिकोण को समझकर न्यायपालिका व वकालत में नवीन ऊर्जा का संचार करेंगे।
स्टडी सर्किल का प्रारंभ संयोजक वैभव पारीक ने प्रो. शर्मा को पटका भेंट कर एवं सादर स्वागत कर किया। कार्यक्रम के समापन पर अधिवक्ता दीक्षा मिश्रा और नेहा गोयल ने प्रो. शर्मा को स्मृति चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रांत महामंत्री अभिषेक सिंह, प्रांत अध्यक्ष प्यारे लाल, तथा अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय मंत्री कमल परसावल सहित उच्च न्यायालय के बड़ी संख्या में अधिवक्ता एवं विधिकर्मी उपस्थित रहे। वहीं अधिवक्ता परिषद की इस विषय-श्रृंखला की अगली कड़ी अगले सप्ताह आयोजित की जाएगी। जानकारी के अनुसार, महानगर न्यायालय इकाई द्वारा सेशन न्यायालय परिसर में विशेष स्टडी सर्किल का आयोजन किया जाएगा। इस आगामी सत्र में प्रो. शर्मा द्वारा अधूरे छोड़े गए बिंदुओं, विशेष रूप से भारतीय फौजदारी विधान की विशिष्टताओं तथा धर्मशास्त्र के आधुनिक न्यायिक उपयोग पर विस्तृत चर्चा की संभावना जताई जा रही है। इकाई महामंत्री धर्मेंद्र बराला ने कार्यक्रम का संचालन किया अंत में इकाई के इकाई अध्यक्ष धर्मेंद्र जैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

