पीबीएम ट्रोमा हॉस्पिटल में प्रदेश की पहली ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर लैब का ट्रायल मंगलवार से
बीकानेर, 5 जनवरी (हि.स.)। पीबीएम अस्पताल से संबद्ध ट्रोमा हॉस्पिटल में प्रदेश की पहली अत्याधुनिक ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर (ओबीआरसी) लैब का ट्रायल मंगलवार से शुरू किया जाएगा। यह लैब हड्डी एवं मस्क्यूलोस्केलेटल रोगों के उपचार में नई तकनीक के रूप में काम करेगी।
ट्रोमा हॉस्पिटल प्रभारी एवं वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. बी.एल. खजोतिया ने बताया कि ओबीआरसी एक आधुनिक ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव उपचार पद्धति है, जिसके माध्यम से शरीर में प्राकृतिक रूप से हीलिंग और टिशू रिपेयर को प्रोत्साहित किया जाता है। इस पद्धति में मरीज के स्वयं के रक्त और बोन मैरो से प्राप्त ब्लड कंपोनेंट्स को संकेंद्रित कर उपचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस ट्रायल क्लीनिक और लैब में रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा शोधात्मक कार्य भी किए जाएंगे। यह तकनीक पिछले चार–पांच वर्षों से रेजिडेंट डॉक्टर्स द्वारा अपनी थीसिस के अंतर्गत उपयोग में लाई जा रही है, जिसमें उल्लेखनीय और सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस रिसर्च क्लीनिक को क्लिनिकल रिसर्च कमेटी की स्वीकृति प्राप्त है।
वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कपूर ने बताया कि ओबीआरसी उपचार एक मिनिमम इनवेसिव तकनीक है, जिसमें बिना किसी ऑपरेशन, चीर-फाड़ या स्टेरॉयड के उपचार संभव है। यह ओपीडी आधारित डे-केयर प्रक्रिया है, जिसमें मरीज लगभग एक घंटे में उपचार लेकर घर लौट सकता है। इस तकनीक का उपयोग स्पोर्ट्स इंजरी, शोल्डर, आर्थराइटिस, फ्रोजन शोल्डर, टेनिस और गोल्फर एल्बो, घुटना, हिप, एंकल, प्लांटर फेशियाइटिस, हड्डियों के डिलेड या नॉन यूनियन, डिस्क प्रोलैप्स सहित विभिन्न रोगों में किया जाएगा।
डॉ. कपूर ने बताया कि लैब की स्थापना में नोखा के भामाशाह मघाराम कुलरिया का सहयोग रहा है और आगे भी सहयोग का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने बताया कि ओबीआरसी की स्थापना के बाद शीघ्र ही ऑर्थोपेडिक मेडिकल रिसर्च सेंटर की स्थापना भी की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि ट्रोमा सेंटर प्रभारी डॉ. बी.एल. खजोतिया और वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कपूर पिछले चार–पांच वर्षों से इस अत्याधुनिक लैब की स्थापना के लिए प्रयासरत थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

