भक्ति,ध्यान और सकारात्मक ऊर्जा से मिलेगा जीवन का समाधान: डॉ. पवन सिन्हा
जयपुर, 19 जुलाई (हि.स.)। महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में रविवार को आयोजित विराट सत्संग में विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. पवन सिन्हा 'गुरुजी' ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों के माध्यम से भक्ति, ध्यान और सकारात्मक जीवन-दृष्टि का संदेश दिया। देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सत्संग में भाग लेकर आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त किया।
डॉ. पवन सिन्हा ने कहा कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं, बल्कि सत्य, करुणा, धैर्य, अनुशासन और समर्पण को जीवन में उतारने का नाम है। उन्होंने वाल्मीकि रामायण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए रामराज्य की अवधारणा पर प्रकाश डाला तथा सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के प्रति आपत्तिजनक सामग्री को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
उन्होंने अवसाद,तनाव और असफलता से उबरने के लिए आध्यात्मिक शिक्षा, ध्यान और सकारात्मक सोच को सबसे प्रभावी उपाय बताते हुए कहा कि ध्यान के बिना पूजा और भक्ति अधूरी है। नियमित ध्यान मन को स्थिरता, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गुरुजी के मार्गदर्शन में ध्यानाभ्यास भी किया।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश का युवा भीड़ नहीं, बल्कि राष्ट्र का कर्णधार है। युवाओं को अपनी ऊर्जा और क्षमता पहचानकर अध्यात्म, संस्कार और ध्यान के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने बच्चों के संस्कार निर्माण और आध्यात्मिक शिक्षा पर विशेष बल दिया।
सत्संग में आश्रम की सुर साधक मंडली ने गुरुजी द्वारा रचित भजनों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में विधायक कालीचरण सराफ, पुरुषोत्तम तुलसियान, शशि तुलसियान, मनोज मुद्गल, आरएएस पंकज ओझा, मुन्ना दास महाराज, डॉ. संजय बियानी, मुकेश पारीक, ऋतु रावत, योगेश नरूला, रुचि नरूला, शशि शर्मा, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. गौरव, डॉ. कनक शर्मा और विक्रम मालवीय सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
डॉ. पवन सिन्हा दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर तथा पावन चिंतन धारा आश्रम के संस्थापक हैं। वे पिछले 45 वर्षों से भारतीय संस्कृति, वेदांत दर्शन और आध्यात्मिक जीवन मूल्यों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

