राजस्थान में देश की पहली सोडियम-आयन बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट होगा शुरू

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राजस्थान में देश की पहली सोडियम-आयन बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट होगा शुरू


जयपुर, 28 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और विद्युत वितरण नेटवर्क को अधिक कारगर बनाने की दिशा में जयपुर डिस्कॉम ने महत्वपूर्ण पहल की है। जयपुर विद्युत वितरण निगम और ऊर्जा क्षेत्र की वैश्विक संस्था ग्लोबल एनर्जी एलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट (जी-ऐप) के बीच देश की पहली वितरण ट्रांसफॉर्मर स्तर की सोडियम-आयन बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की पायलट परियोजना विकसित करने जा रहे हैं।

विद्युत वितरण निगमों की राष्ट्रीय कांफ्रेंस के दूसरे दिन इन दोनों संस्थाओं ने इसके लिए जयपुर के के.एल. सैनी स्टेडियम में 250 किलोवाट/250 किलोवाट-घंटा क्षमता की पायलट परियोजना को विकसित करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रण (आरएफपी) जारी किया। इस परियोजना के माध्यम से जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में विद्युत की अधिकतम स्थानीय मांग का प्रबंधन करने तथा रूफ टॉप सोलर से उत्पादित बिजली का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने में सोडियम-आयन बैटरी तकनीक की क्षमता का आकलन किया जाएगा।

परियोजना के तहत वितरण ट्रांसफॉर्मर के स्तर पर ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित कर यह आकलन किया जाएगा कि उपभोक्ताओं के नजदीक बैटरी एनर्जी भंडारण सिस्टम स्थापित करने से ट्रांसफॉर्मर पर अधिकतम विद्युत मांग के दौरान निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में कितनी सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही लिथियम-आयन जैसी प्रचलित बैटरी तकनीकों के विकल्प के रूप में सोडियम-आयन तकनीक की उपयोगिता भी परखी जाएगी।

इसके अनुसार जयपुर डिस्कॉम परियोजना के लिए स्थान, तकनीकी कार्मिक और संचालन संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराएगा। वहीं, ग्लोबल एनर्जी एलायंस प्रणाली के डिजाइन, प्रदर्शन की निगरानी और तकनीकी सहयोग के साथ-साथ डिस्कॉम के अभियंताओं को प्रशिक्षण प्रदान करेगा। दोनों संस्थाएं परियोजना के निष्कर्ष एवं परिणामों को साझा करेंगी, ताकि देश की अन्य विद्युत वितरण कंपनियां भी अपने नेटवर्क में सोडियम-आयन ऊर्जा भंडारण प्रणाली की उपयुक्तता का आकलन कर सकें।

इस पहल पर शासन सचिव ऊर्जा एवं राजस्थान डिस्कॉम्स की अध्यक्ष आरती डोगरा ने कहा कि पीक समय में जैसे ही बिजली की मांग बढ़ती है। विद्युत तंत्र पर उसका सबसे प्राथमिक असर वितरण ट्रांसफॉर्मर के स्तर पर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि यह पायलट परियोजना प्रदेश के वितरण नेटवर्क को कारगर बनाने, रूफ टॉप सोलर से उत्पन्न सौर ऊर्जा को भंडारित करने और यहां की जलवायु परिस्थितियों में यह परीक्षण करने का अवसर प्रदान करेगी कि लिथियम-आयन के विकल्प के रूप में ऊर्जा भंडारण तकनीक इस दबाव को कम करने में कितनी प्रभावी हो सकती है। परियोजना से प्राप्त अनुभव भविष्य में विद्युत वितरण नेटवर्क में ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की स्थापना से संबंधित अधिक विश्वसनीय निर्णय लेने में सहायक होंगे।

ग्लोबल एनर्जी एलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट की कंट्री हेड तान्या सिंघल ने कहा कि आने वाले समय में भारत के विद्युत ग्रिड में ऊर्जा भंडारण की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और विद्युत वितरण कंपनियों के पास चयन के लिए एक से अधिक विश्वसनीय बैटरी तकनीकों के विकल्प होने चाहिए। राजस्थान की परिस्थितियों में कार्यरत ट्रांसफॉर्मर पर सोडियम-आयन तकनीक का परीक्षण विद्युत वितरण कंपनियों को अनुमानों के बजाय वास्तविक आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने में मदद करेगा। उन्होंने जयपुर डिस्कॉम के साथ इस पहल को आगे बढ़ाने और इससे प्राप्त अनुभवों को देशभर की विद्युत वितरण कंपनियों के साथ साझा करने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

नेटवर्क स्तर पर प्राप्त जानकारी और उभरती ऊर्जा भंडारण तकनीक के वास्तविक परीक्षण को एक साथ लाने वाली यह परियोजना भारत में विकेन्द्रीकृत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों तथा विद्युत वितरण ग्रिड के आधुनिकीकरण से संबंधित भविष्य के निर्णयों के लिए व्यावहारिक एवं प्रमाण-आधारित जानकारी उपलब्ध कराएगी।

उल्लेखनीय है कि ग्लोबल एनर्जी एलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट एक वैश्विक गैर-लाभकारी संस्था है, जो स्वच्छ ऊर्जा और आर्थिक अवसरों को गति देने के लिए सार्वजनिक, निजी और परोपकारी संस्थाओं के बीच साझेदारी विकसित करती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

Livevns.news Desk
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