पटाखों का धुआं, धूल और बदलता मौसम अस्थमा रोगियों के लिए चुनौती: डॉ. विकास पिलानिया

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पटाखों का धुआं, धूल और बदलता मौसम अस्थमा रोगियों के लिए चुनौती: डॉ. विकास पिलानिया


जयपुर, 06 नवंबर (हि.स.)। दीपावली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, लेकिन पटाखों से निकलने वाला धुआं अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। पटाखों से निकलने वाले हानिकारक गैसीय प्रदूषक श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं। इससे खांसी, घरघराहट और सांस फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत भी आ सकती है।

मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर के एलर्जी एवं अस्थमा रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास पिलानिया के अनुसार, पटाखों से निकलने वाले प्रदूषक अस्थमा के दौरे को बढ़ा सकते हैं। इनसे श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है। पटाखों का धुआं बच्चों में ब्रोन्कियल अस्थमा को उकसाने वाले कारकों में शामिल है। विशेषज्ञ के अनुसार, श्वसन संबंधी बीमारी का पहले कोई इतिहास नहीं होने पर भी कुछ लोगों में दीपावली के दौरान खांसी, घरघराहट और सांस फूलने जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।

पटाखों में इस्तेमाल होने वाले पोटेशियम नाइट्रेट, कार्बन और सल्फर जलने पर सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड सहित कई हानिकारक पदार्थ हवा में फैलते हैं। इनके संपर्क में आने से नाक और श्वसन मार्ग में जलन हो सकती है। अस्थमा और सीओपीडी जैसे रोगों से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।

दीपावली के आसपास मौसम में बदलाव, एलर्जी के कारकों में वृद्धि और सर्दियों की शुरुआत भी अस्थमा रोगियों के लिए चुनौती बनती है। त्योहार के दौरान घरों की सफाई, पेंटिंग और धूल-मिट्टी के संपर्क में आने से भी एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

डॉ. विकास पिलानिया ने अस्थमा और एलर्जी के मरीजों को कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि घर की सफाई के दौरान धूल से बचें और संभव हो तो सफाई की जिम्मेदारी किसी अन्य को दें। सफाई जरूरी हो तो गीले कपड़े या वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें। जरूरत पड़ने पर मास्क पहनें और पटाखे जलने के दौरान घर की खिड़कियां बंद रखें।

उन्होंने पौष्टिक भोजन लेने की सलाह देते हुए कहा कि अधिक तैलीय भोजन और घी से बनी भारी मिठाइयों से परहेज करना बेहतर है। घर का बना भोजन, ताजे फल और सब्जियां आहार में शामिल करें। बच्चों को भी वायु प्रदूषण और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जागरूक करें। अस्थमा एवं ब्रोंकाइटिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, बच्चों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन विकारों की समस्या लगातार बढ़ रही है। करीब 10 से 12 प्रतिशत बच्चों में ऐसी शिकायतें बताई गई हैं।

विशेषज्ञ ने शराब और धूम्रपान से दूर रहने की सलाह भी दी है। उन्होंने कहा कि मरीज अपनी अस्थमा की दवाएं और इन्हेलर नियमित रूप से लेते रहें। दवा लेने के बावजूद खांसी, घरघराहट या सांस फूलने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र में जाकर उपचार लें।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

Livevns.news Desk
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