सिन्ध एक दिन फिर भारत का हिस्सा बन सकता है: देवनानी

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सिन्ध एक दिन फिर भारत का हिस्सा बन सकता है: देवनानी


नई दिल्ली/जयपुर, 10 अप्रैल (हि.स.)। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विश्वास जताया है कि भविष्य में एक समय ऐसा आ सकता है जब सिन्ध, जो वर्तमान में पाकिस्तान का हिस्सा है, फिर से भारत का अभिन्न अंग बन सकता है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज ने हमेशा अपने आपको शरणार्थी नहीं बल्कि पुरुषार्थी माना है और भारत व सनातन संस्कृति के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी है।

देवनानी नई दिल्ली स्थित वाइस प्रेसीडेंट एनक्लेव में आयोजित एक समारोह में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सीपी राधाकृष्णन द्वारा भारतीय संविधान के सिंधी (देवनागरी और फारसी लिपि) में प्रकाशित संस्करणों का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल तथा सांसद शंकर लाल नंदवानी सहित देशभर से आए सिंधी समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

देवनानी ने कहा कि आजादी से पहले सिन्ध भारत का हिस्सा था, लेकिन भारत विभाजन 1947 के बाद लाखों सिंधी परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने भारत के प्रति अपनी आस्था और समर्पण बनाए रखा।

उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में परिस्थितियां बदल सकती हैं।

उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता को विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में बताते हुए कहा कि यह भारत की आत्मा से जुड़ी हुई है। विभाजन के बाद भारत आए सिंधी समाज ने देश के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बताया कि देश में लगभग एक करोड़ सिंधी समाज के लोग रहते हैं, जो अपनी उद्यमशीलता और कर्मठता के लिए जाने जाते हैं।

कार्यक्रम में देवनानी ने भारतीय संविधान के सिंधी भाषा में प्रकाशन को ऐतिहासिक कदम बताया और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि 1967 में सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के बाद यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देवनानी ने प्रधानमंत्री द्वारा 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा को भी सिंधी समाज के सम्मान और स्वाभिमान से जोड़ते हुए सराहना की।

समारोह में राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से 200 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें कई सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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