वनवासी विद्यार्थियों के लिए सेवा का संकल्प, हरिशेवा धर्मशाला ने बांटे 811 कंबल व 25 हजार का सहयोग
भीलवाड़ा, 17 मार्च (हि.स.)। समाज सेवा और मानवता की सच्ची भावना को साकार करते हुए भीलवाड़ा के हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर व हरिशेवा धर्मशाला द्वारा वनवासी क्षेत्रों के लिए सराहनीय सेवा अभियान संचालित किया गया। इस अभियान के तहत उदयपुर क्षेत्र के विभिन्न वनवासी हॉस्टलों में रह रहे छात्र-छात्राओं एवं वहां कार्यरत स्टाफ की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बड़ी मात्रा में उपयोगी सामग्री प्रदान की गई।
हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में आयोजित इस सेवा कार्य ने समाज में सहयोग और संवेदनशीलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रातःकालीन हल्की सर्दी को देखते हुए जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से 811 पतले कंबल, 811 शॉल, 31 साड़ियां एवं दुपट्टों का वितरण किया गया। इसके साथ ही 25 हजार का चेक भी सहयोग स्वरूप प्रदान किया गया, जिससे हॉस्टलों की अन्य आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
इस समस्त सामग्री एवं सहयोग राशि को राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद की जिलाध्यक्ष मनीषा जाजू, संरक्षक पल्लवी वच्छानी तथा प्रांत नगरीय कार्य प्रमुख रामप्रकाश अग्रवाल को सौंपा गया। परिषद के माध्यम से यह सामग्री उदयपुर क्षेत्र के विभिन्न वनवासी छात्रावासों में पहुंचाकर वहां रह रहे विद्यार्थियों एवं स्टाफ को वितरित की जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी हंसराम उदासीन ने कहा कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरिशेवा धर्मशाला द्वारा हर वर्ष समय-समय पर ऐसे सेवा कार्य आयोजित किए जाते हैं, ताकि जरूरतमंदों को राहत मिल सके और समाज में परोपकार की भावना को बढ़ावा मिले। उन्होंने उपस्थित लोगों से भी आग्रह किया कि वे अपने सामर्थ्य के अनुसार समाज सेवा के कार्यों में भाग लें और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं।
इस अवसर पर आश्रम के संत मायाराम, संत गोविंद राम, संत केशव राम, धर्मशाला के सचिव हेमंत वच्छानी, लघु उद्योग भारती से रविंद्र जाजू, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघ चालक चांदमल सोमानी, ईश्वर आसनानी सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने इस सेवा अभियान की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल को सराहा और कहा कि इस प्रकार के सेवा कार्य न केवल जरूरतमंदों को राहत पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी देते हैं। वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों के लिए यह सहयोग निश्चित रूप से उपयोगी साबित होगा और उन्हें बेहतर वातावरण में अध्ययन करने की प्रेरणा देगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद

