परिवहन विभाग की अनदेखी से स्कूली बच्चों की जान सांसत में

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परिवहन विभाग की अनदेखी से स्कूली बच्चों की जान सांसत में


जयपुर, 01 मई (हि.स.)। परिवहन विभाग की कथित अनदेखी के चलते जयपुर में स्कूली बच्चों की जान पर सांसत बनी हुई है। स्कूल संचालकों द्वारा बच्चों के परिवहन में उपयोग लाई जा रही बसों में नियमों की अवहेलना की जा रही है। इससे कभी भी हादसा हो सकता है। पूर्व में लापरवाही की वजह से बस के नीचे या चपेट में आने से स्कूल के ही छात्र या छात्रा की मौत हो चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जयपुर में स्कूल बसों की चपेट में आने से छात्रों की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जो शहर में स्कूली परिवहन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाते हैं। स्कूलों में नया सत्र आरंभ हो चुका है, लेकिन परिवहन विभाग ने बच्चों की सुरक्षा लेकर स्कूल बसों की जांच तक करने तक की जहमत नहीं उठाई। लगता है कि परिवहन विभाग को किसी हादसे का इंतजार है। हादसे के बाद ही परिवहन विभाग नींद टूटती और वह कार्रवाई करता है, लेकिन यह कार्रवाई भी खानापूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं होती है। जबकि स्कूल बसों की जांच का काम लगातार जारी रहना चाहिए ताकि किसी मासूम की जान न जाए।

फरवरी 2025 से अप्रैल 2026 तक दर्ज हादसे

अप्रैल 2026 (कोटपूतली): कोटपूतली के कैंमपुराबास गांव में स्कूल परिसर में ही स्कूल बस के नीचे आने से 3 साल के मासूम की मौत हो गई।

फरवरी 2025 (चौमूं, जयपुर): जयपुर के चौमूं में एक निजी स्कूल की बस अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे एक छात्रा की मौके पर ही मौत हो गई और करीब 9-10 अन्य छात्र घायल हो गए। यह बस बिना परमिट के चल रही थी और इसकी फिटनेस भी समाप्त हो चुकी थी। अक्टूबर 2025 (दूदू, जयपुर): दूदू के रहलाना गांव के पास स्टियरिंग फेल होने के कारण स्कूल बस पेड़ से टकरा गई, जिसमें 4 बच्चे घायल हो गए।

नवंबर 2025: जयपुर में एक स्कूल बस की चपेट में आने से कॉलेज छात्रा की मौत हो गई, जिसके बाद बस चालक का लाइसेंस रद्द कर दिया गया।

करणी विहार क्षेत्र (मार्च 2025): हीरापुरा इलाके में एक निजी स्कूल बस की चपेट में आने से 3 साल की मासूम बच्ची पूर्वीका त्यागी की मौत हो गई। घटना तब हुई जब बच्ची अपनी मां के साथ अपने भाई को स्कूल बस से लेने गई थी। चालक धानू सिंह लापरवाही से बस चलाकर मौके से फरार हो गया था।

दौलतपुरा थाना इलाका (दिसंबर 2023) में बगवाड़ा गांव में एक 3 साल के मासूम अमन को स्कूल बस ने कुचल दिया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। करीब 7 माह पहले हरमाड़ा इलाके में बैनाड़ रोड के पास स्थित मां करणी नगर में एक स्कूल बस ने 7 साल की मासूम को कुचल दिया। बच्ची उसी बस से उतरकर दौड़ कर घर की ओर जा रही थी, तभी ड्राइवर ने गाड़ी चला दी। हादसे के बाद चालक बस छोड़कर भाग गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्कूल बसें अक्सर तेज गति (60-70 किलोमीटर/घंटा) से चलती हैं। कई बसें बिना वैलिड फिटनेस या परमिट के चल रही हैं। स्कूल बसों के चालक अक्सर लापरवाही से वाहन चलाते हैं और दुर्घटना के बाद फरार हो जाते हैं। बसों में क्षमता से अधिक बच्चे बिठाए जाते है और सुरक्षा मानकों का पालना भी नहीं की जाती। सीसीटीवी, जीपीएस ट्रैकर, और पैनिक बटन की जांच नहीं होती है।

बस के आगे और पीछे स्कूल बस लिखा होना अनिवार्य है। यदि बस किराए पर ली गई है, तो उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए। बस का रंग पीला होना चाहिए और स्कूल का नाम व टेलीफोन नंबर दोनों तरफ लिखा होना चाहिए। खिड़कियों पर हॉरिजॉन्टल ग्रिल लगी होनी चाहिए। बस में अग्निशामक यंत्र और प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स होना अनिवार्य है। बच्चों की सुरक्षा की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस ट्रैकर और पैनिक बटन लगाने के निर्देश दिए गए हैं। बसों की गति सीमा सीमित करने के लिए गति नियंत्रक उपकरण लगाना जरूरी है। बस ड्राइवर और अटेंडेंट का पुलिस सत्यापन अनिवार्य है। ड्राइवर के पास भारी वाहनों के लिए वैध लाइसेंस और कम से कम 4-5 साल का अनुभव होना चाहिए। बस में एक प्रशिक्षित अटेंडेंट (महिला अटेंडेंट भी हो सकती है) का होना अनिवार्य है जो बच्चों को बस में चढऩे और उतरने में मदद करे। 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मामले में, ले जाए जाने वाले बच्चों की संख्या अनुमत बैठने की क्षमता के डेढ़ गुना (1.5 गुना) से अधिक नहीं होनी चाहिए। स्कूल बैग रखने के लिए सीटों के नीचे पर्याप्त जगह होनी चाहिए, उन्हें छत पर या बाहर नहीं लटकाना चाहिए। बस में पीने के पानी की उपलब्धता होनी चाहिए। ड्राइवर और अटेंडेंट के लिए निर्धारित ड्रेस कोड हो सकता है। ये नियम बच्चों को सुरक्षित स्कूल भेजने और वापस लाने के लिए एक सुरक्षा घेरा प्रदान करते हैं।

इस संबंध में आरटीओ, जयपुर राजेंद्र सिंह शेखावत का कहना है कि स्कूल बसों में सुरक्षा नियमों की पालना हो रही है या नहीं इसकी जांच को लेकर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्कूल बस में सुरक्षा नियमों की सूची तैयार की जा रही है। इसके बाद आगामी समय में जांच करने की योजना बनाई जाएगी। ,

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश

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