‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत पच्चीस गांवों का भ्रमण कर 1,650 से अधिक किसानों को किया जागरूक

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‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत पच्चीस गांवों का भ्रमण कर 1,650 से अधिक किसानों को किया जागरूक


बीकानेर, 01 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा भारत सरकार के ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत माहभर व्यापक जन-जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया। अभियान का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि, वैज्ञानिक उष्ट्र पालन तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना रहा। यह अभियान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव डॉ. एम. एल. जाट के मार्गदर्शन में एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया के नेतृत्व में संचालित किया गया।

अभियान के दौरान केन्द्र के वैज्ञानिकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने बीकानेर जिले के लगभग 25 गांवों का भ्रमण कर 1,658 किसानों (1,066 पुरुष एवं 592 महिला किसानों) से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया। इस अवधि में किसान गोष्ठियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, वैज्ञानिक परामर्श, क्षेत्रीय प्रदर्शन, ग्राम स्तरीय बैठकों एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से मृदा परीक्षण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, जलवायु-अनुकूल कृषि तथा वैज्ञानिक उष्ट्र पालन संबंधी जानकारी प्रदान की गई। अभियान के अंतर्गत महिला किसानों, स्वयं सहायता समूहों एवं ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उन्हें टिकाऊ आजीविका एवं प्राकृतिक संसाधन संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया गया।

केन्द्र की ओर से अभियान के आयोजन सचिव डॉ. बी.श्रीशैलम ने बताया कि इस दौरान विश्व पर्यावरण दिवस, पीएम-किसान लाइव कार्यक्रम तथा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजनों एवं महाविद्यालय स्तर पर भी किसानों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं आमजन को अभियान से जोड़ते हुए सतत कृषि, संतुलित उर्वरक उपयोग, जलवायु-अनुकूल खेती तथा कृषि क्षेत्र में रोजगार एवं अनुसंधान की संभावनाओं से अवगत कराया गया। सभी गतिविधियों, किसान सहभागिता एवं फील्ड रिपोर्टों को प्रतिदिन किसान सारथी पोर्टल, केन्द्र के फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स (पूर्व ट्विटर) एवं व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर अपलोड कर प्रतिदिन वैज्ञानिक परामर्श, जागरूकता संदेश, सफलता की कहानियां एवं वीडियो साझा किए गए, जिससे अभियान को लगभग 1.59 लाख डिजिटल इम्प्रेशन प्राप्त हुए और इसकी पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों से चलकर व्यापक स्तर तक बनी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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