अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभावना के संस्कारों का केंद्र है संघ शिक्षा वर्ग

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अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभावना के संस्कारों का केंद्र है संघ शिक्षा वर्ग


अलवर, 02 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आदर्श विद्या मंदिर मालवीय नगर अलवर में 21 मई से 5 जून तक 40 से 65 वर्ष आयु वर्ग के स्वयंसेवकों के लिए आयोजित संघ शिक्षा वर्ग (विशेष) व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभावना के संस्कारों की एक व्यापक कार्यशाला के रूप में संचालित हो रहा है। वर्ग में जयपुर प्रांत के विभिन्न जिलों से आए 167 स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं।

वर्ग में स्वयंसेवकों को सुव्यवस्थित जीवनचर्या के माध्यम से सामाजिक समरसता, अनुशासन, श्रम साधना, राष्ट्रभक्ति तथा नैतिक मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही समाज के वंचित वर्गों के प्रति सेवा भाव विकसित करने, जनसंपर्क और संवाद के व्यावहारिक कौशल सीखने तथा सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।

वर्ग के विभिन्न सत्रों में पर्यावरण संरक्षण, गौसेवा, ग्राम विकास, धर्म जागरण, सामाजिक समरसता और कुटुंब प्रबोधन जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

संघ शिक्षा वर्ग की दिनचर्या पूरी तरह अनुशासित और समयबद्ध है। सभी सूचनाएं और कालांश परिवर्तन सीटी के माध्यम से दिए जाते हैं। प्रतिदिन प्रातः 4:15 बजे जागरण के साथ दिन की शुरुआत होती है। दैनिक नित्यकर्म के बाद स्वयंसेवक सामूहिक रूप से एकात्म स्तोत्र का पाठ करते हैं। प्रातः 5:20 बजे से 6:30 बजे तक तथा सायंकाल 6:15 बजे से 7:15 बजे तक संघ स्थान आयोजित होता है, जिसमें शारीरिक अभ्यास, खेल, बौद्धिक गतिविधियां और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम होते हैं। इसके बाद सामूहिक योग एवं प्राणायाम का सत्र आयोजित किया जाता है। दिनभर संवाद, चर्चा और बौद्धिक सत्रों के माध्यम से स्वयंसेवकों के वैचारिक एवं नैतिक विकास का प्रयास किया जाता है।

वर्ग में दोपहर का भोजन 12:15 बजे तथा रात्रि भोजन 8 बजे होता है। भोजन व्यवस्था भी सामाजिक समरसता का उदाहरण प्रस्तुत करती है। भोजन समाज के विभिन्न वर्गों से बिना किसी जातिगत भेदभाव के प्राप्त होता है और सभी स्वयंसेवक सामूहिक रूप से भोजन ग्रहण करते हैं। निर्धारित समय में भोजन संपन्न करना अनुशासन और सुव्यवस्था का परिचायक है। रात्रि 9 बजे से 10 बजे तक प्रतिभा प्रकटीकरण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें देशभक्ति और भारतीय संस्कृति से जुड़े गीत, प्रस्तुतियां और कार्यक्रम शामिल रहते हैं। रात्रि 10 बजे शयन के साथ दिनचर्या का समापन होता है।

वर्ग में स्वयंसेवकों को आत्मनिर्भरता और श्रम की गरिमा का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। स्वयंसेवक अपने भोजन के बर्तन साफ करने, कपड़े धोने, आवासीय कक्षों, बरामदों, मैदानों तथा शौचालय एवं स्नानागारों की सफाई स्वयं करते हैं।

जल संरक्षण के उद्देश्य से बर्तनों की सफाई में बालू-रेत का उपयोग किया जा रहा है। वर्ग की यह व्यवस्था श्रम के महत्व, सेवा भाव, स्वावलंबन तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देती है। संघ शिक्षा वर्ग के माध्यम से स्वयंसेवकों में राष्ट्र जीवन के विविध आयामों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के साथ-साथ समाज एवं राष्ट्र के लिए समर्पित नेतृत्व तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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