कृषि क्षेत्र में चुनौतियों के त्वरित निवारण की आवश्यकता: प्रो. जैतावत

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कृषि क्षेत्र में चुनौतियों के त्वरित निवारण की आवश्यकता: प्रो. जैतावत


क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति की दो दिवसीय बैठक संपन्न

जोधपुर, 10 अपै्रल (हि.स.)। कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. बीआर चौधरी कृृषि अनुसंधान केन्द्र मण्डोर में क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति (जर्क) की दो दिवसीय बैठक का समापन समारोह आयोजित हुआ।

इस दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. (डॉ.) वीरेंद्र सिंह जैतावत ने कहा कि हमारे सामने कृषि के क्षेत्र में कई चुनौतियां हैं, जिनमें सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य में गिरावट व जलवायु परिवर्तन प्रमुख है, साथ ही इन समस्याओं के निवारण की भी अत्यंत आवश्यकता है। इन समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने वैज्ञानिकों से क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान कार्य करने का आह्वान किया, ताकि पश्चिमी राजस्थान के किसानों की आय में वृद्धि हो सके। बैठक में निदेशक, अनुसंधान, डॉ. एमएम सुंदरिया ने कहा कि किसानों की समस्याओं का जो फीडबैक प्राप्त हुआ है, उस आधार पर इन समस्याओं के निदान के लिए आने वाली खरीफ में हमारे वैज्ञानिकों द्वारा अनुसंधान किया जाएगा।

इस दौरान अतिरिक्त निदेशक, कृषि प्रसार डॉ. जीआर मटोरिया ने सुझाव दिया कि गत वर्षों से पश्चिमी राजस्थान में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है, इसके लिए अलग से पैकेज आफ प्रैक्टिसेज बनाने की आवश्यकता है।

क्षेत्रीय निदेशक, अनुसंधान डॉ. एमएल मेहरिया ने विस्तार कार्यकताओं से आह्वान किया कि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई तकनीकों को किसानों तक पहुंचाये, ताकि वैज्ञानिक शोध का फायदा ज्यादा से ज्यादा किसानों को मिल पाए। बैठक में खरीफ 2025 में हुए अनुसंधानों की समीक्षा की एवं खरीफ 2026 हेतु नये अनुसंधान कार्यक्रम तय किये गये तथा काजरी जोधपुर द्वारा विकसित कृषि तकनीकों पर भी चर्चा की गई।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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