फैंसी नंबर प्लेट लगाई या बिना रिकॉर्ड पुरानी गाड़ी बेची तो होगी कार्रवाई:अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर

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फैंसी नंबर प्लेट लगाई या बिना रिकॉर्ड पुरानी गाड़ी बेची तो होगी कार्रवाई:अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर


जयपुर, 02 जून (हि.स.)। राजधानी में कानून-व्यवस्था,सड़क सुरक्षा और अपराध नियंत्रण को लेकर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने वाहन संबंधी गतिविधियों पर बड़ी सख्ती शुरू कर दी है। बुलेट और अन्य पावर बाइक्स में पटाखों जैसी आवाज निकालने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर, फैंसी नंबर प्लेट और चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस)-2023 की धारा 163 के तहत विशेष प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं।

कार्यपालक मजिस्ट्रेट एवं अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव पचार की ओर से जारी ये आदेश 2 जून से 31 जुलाई 2026 तक पूरे जयपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में प्रभावी रहेंगे। आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए सभी थाना प्रभारियों, एसीपी और डीसीपी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव पचार ने बताया कि शहर में लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ गैराज संचालक और मैकेनिक बुलेट तथा अन्य पावर बाइक्स में मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर उन्हें पटाखों जैसी तेज आवाज निकालने योग्य बना रहे हैं। इससे न केवल आमजन को परेशानी होती है बल्कि सड़क दुर्घटनाओं और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

इसके साथ ही वाहनों पर परिवहन विभाग के निर्धारित मानकों के विपरीत फैंसी, डिजाइनदार और अमानक नंबर प्लेट लगाने के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है। पुलिस का कहना है कि ऐसी नंबर प्लेटों के कारण अपराध में प्रयुक्त वाहनों की पहचान करने में कठिनाई आती है और अपराधियों को लाभ मिलता है।

इस आदेश के तहत कोई भी मैकेनिक या गैराज संचालक किसी वाहन में मॉडिफाइड साइलेंसर नहीं लगाएगा। वाहनों पर केवल परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप नंबर प्लेट ही लगाई जा सकेगी। किसी भी वाहन पर नंबर प्लेट लगाने से पहले उसकी मूल आरसी का सत्यापन करना अनिवार्य होगा। फैंसी और डिजाइनदार नंबर प्लेटों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

इसके अलावा पुलिस कमिश्नरेट ने चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त और उनके आपराधिक गतिविधियों में उपयोग पर रोक लगाने के लिए सेकंड हैंड वाहन कारोबारियों के लिए भी कड़े नियम लागू किए हैं।

पुलिस को मिली सूचनाओं में सामने आया कि कई स्थानों पर पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री बिना पर्याप्त दस्तावेजी प्रक्रिया के की जा रही थी। कई मामलों में वाहन परिवहन विभाग को सूचित किए बिना ही दूसरे व्यक्ति को बेच दिए जाते थे, जिससे अपराध होने पर जांच प्रभावित होती थी और वास्तविक आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 50 के तहत निर्धारित प्रक्रिया, वाहन हस्तांतरण के रिकॉर्ड और स्वामित्व परिवर्तन संबंधी दस्तावेजों का समुचित संधारण नहीं किया जा रहा था।

अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर ने बताया कि सेकंड हैंड वाहनों के डीलर्स, एजेंटों और कबाड़ियों को प्रत्येक वाहन के विक्रेता और खरीदार का पूरा नाम, पता और पहचान संबंधी दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखना होगा। वहीं वाहन खरीद-बिक्री के दौरान मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित फॉर्म संख्या 29 और 30 भरना अनिवार्य होगा।

वाहन के वास्तविक हस्तांतरण की तारीख, समय और लेन-देन का पूरा विवरण रिकॉर्ड में दर्ज करना होगा। परिवहन विभाग की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।

डॉ. राजीव पचार ने कहा कि चोरी की गाड़ियों का इस्तेमाल कई बार लूट, डकैती और अन्य गंभीर अपराधों में किया जाता है। नए आदेशों का उद्देश्य वाहन चोर गिरोहों, असामाजिक तत्वों और अपराधियों के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाना है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 सहित अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। आदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार प्रेस, सोशल मीडिया, पुलिस थानों, उपायुक्त कार्यालयों और तहसीलों के नोटिस बोर्डों के माध्यम से किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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