आरजीएचएस में अब डॉक्टर को खुद करनी होगी पर्ची की जांच और सत्यापन

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आरजीएचएस में अब डॉक्टर को खुद करनी होगी पर्ची की जांच और सत्यापन


जयपुर, 29 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत जारी होने वाली चिकित्सकीय पर्चियों और प्रिस्क्रिप्शन की विश्वसनीयता तय करने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने नए निर्देश जारी किए हैं। अब आरजीएचएस से जुड़े अस्पतालों में प्रिस्क्रिप्शन पर संबंधित एम्पैनल्ड चिकित्सक को स्वयं जांच, सत्यापन और अपने हस्ताक्षर व मुहर से प्रमाणित करना अनिवार्य होगा।

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि जांच के दौरान कुछ मामलों में यह सामने आया कि लाभार्थियों की प्रिस्क्रिप्शन पर्चियां जूनियर रेजिडेंट अथवा अन्य कार्मिकों द्वारा तैयार कर हस्ताक्षरित की जा रही थीं। संबंधित आरजीएचएस से संबद्ध पंजीकृत चिकित्सक द्वारा उनका विधिवत सत्यापन और प्रमाणीकरण नहीं किया जा रहा था। इसे देखते हुए विभाग ने प्रिस्क्रिप्शन की जिम्मेदारी सीधे संबंधित चिकित्सक से जोड़ते हुए निर्देश जारी किए हैं।

आरजीएचएस की परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने बताया कि संस्थागत नियमों के अनुसार प्रिस्क्रिप्शन तैयार करने, क्लिनिकल विवरण दर्ज करने अथवा डेटा एंट्री जैसे कार्यों में अन्य कर्मचारियों से सहयोग लिया जा सकता है, लेकिन रोगी के क्लिनिकल निष्कर्ष, निदान, निर्धारित दवाइयां, जांच और उपचार की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित एम्पैनल्ड चिकित्सक की ही होगी।

नए निर्देशों में साफ किया गया है कि कोई भी अन्य व्यक्ति संबंधित चिकित्सक की ओर से प्रिस्क्रिप्शन पर हस्ताक्षर या प्रमाणीकरण नहीं कर सकेगा। यानी अस्पताल में पर्ची तैयार करने में भले ही अन्य कर्मचारी सहयोग करें, लेकिन अंतिम सत्यापन डॉक्टर को स्वयं करना होगा।

विभाग ने साफ किया है कि संबंधित चिकित्सक द्वारा विधिवत सत्यापित और प्रमाणित नहीं किए गए प्रिस्क्रिप्शन को आरजीएचएस क्लेम की जांच एवं पुनर्भरण के दौरान नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता है। ऐसे मामलों में आरजीएचएस के दिशा-निर्देशों और एम्पैनलमेंट की शर्तों के तहत संबंधित अस्पताल या चिकित्सक के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने आरजीएचएस से संबद्ध सभी अस्पतालों को इन निर्देशों की तत्काल और सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। नए नियमों का उद्देश्य मरीजों के उपचार संबंधी रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ यह सुनिश्चित करना है कि हर प्रिस्क्रिप्शन की जिम्मेदारी संबंधित चिकित्सक की स्पष्ट रूप से तय हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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