आयुर्वेद विवि में 80 शोधार्थियों के शोध-सार की समीक्षा
जोधपुर, 09 सितम्बर (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में संस्थागत नैतिक समिति (इंस्टीट्यूशनल एथिकल कमेटी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय के संघटक आयुर्वेद महाविद्यालय के 14 विभागों के लगभग 80 स्नातकोत्तर एवं पीएचडी शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत शोध-सारों की समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान शोध के उद्देश्य, अध्ययन की रूपरेखा, शोध-पद्धति, नैतिक पक्ष, वैज्ञानिक प्रासंगिकता एवं अपेक्षित परिणामों का विस्तृत परीक्षण किया गया। समिति के सदस्यों ने शोधार्थियों को उनके शोध-सार में आवश्यक संशोधन एवं सुधार के लिए सुझाव दिए तथा शोध कार्य को अधिक वैज्ञानिक, गुणवत्तापूर्ण एवं समाजोपयोगी बनाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। संस्थागत नैतिक समिति के अध्यक्ष श्रीकृष्ण शर्मा ने कहा कि शोध की वैज्ञानिक गुणवत्ता के साथ-साथ शोध में शामिल प्रतिभागियों के अधिकारों एवं हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समिति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। शोध-सार के स्तर पर ही गहन समीक्षा एवं उचित मार्गदर्शन से शोध कार्य को बेहतर दिशा प्रदान की जा सकती है। कुलगुरु प्रोफेसर वैद्य गोविंद सहाय शुक्ला ने कहा कि जनस्वास्थ्य की चुनौतियों के समाधान शोध एवं नवाचार की महत्ती आवश्यकता हैं। उन्होंने शोधार्थियों से नवीन एवं समाजोपयोगी विषयों पर निर्धारित वैज्ञानिक एवं नैतिक मानकों के अनुरूप शोध कार्य करने का आह्वान किया।
बैठक में ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद गोवा के प्रोफेसर शिवकुमार हर्ती, आईटीआरए जामनगर के प्रोफेसर भूपेश पटेल, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एलएन बुनकर, डीन फैकल्टी ऑफ़ आयुर्वेद प्रोफेसर गोविंद प्रसाद गुप्ता, प्राचार्य प्रोफेसर चन्दन सिंह, प्रोफेसर महेंद्र कुमार शर्मा परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर राजाराम अग्रवाल, प्रोफेसर ए निलिमा रेड्डी, प्रोफेसर देवेंद्र चाहर, एडवोकेट मोहित, समन्वयक प्रोफेसर दिनेश शर्मा, सह समन्वयक प्रोफेसर हरीश कुमार सिंघल सहित देश के प्रख्यात विषय विशेषज्ञ, संबंधित विभागों के शिक्षकगण एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

